पणजी , अक्टूबर 06 -- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को कहा कि सशक्त लोकतंत्र के लिए संवाद और सार्थक जनभागीदारी जरुरी होती है।

श्री बिरला ने गोवा विधानसभा भवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर यहां आयोजित रजत जयंती समारोह के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि विधानमंडल चर्चा, संवाद और बहस के प्रमुख मंच हैं। उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक शक्ति उसकी संस्थाओं की विविध विचारों और दृष्टिकोणों को समाहित करने की क्षमता में निहित है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अपने मतदाताओं की आकांक्षाओं, समस्याओं और चुनौतियों के प्रति संवेदनशील रहने तथा उनके समयबद्ध समाधान के लिए काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब सहमति के साथ असहमति के लिए भी पर्याप्त स्थान हो और विधायी प्रक्रिया में समाज के विभिन्न वर्गों के विचारों को शामिल किया जाये।

उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी के माध्यम से नागरिकों को कानूनों, नीतियों, विधायी बहसों और समितियों के कामकाज की जानकारी आसानी से उपलब्ध करायी जा सकती है। इससे विधानमंडलों में पारदर्शिता और सुलभता बढ़ेगी तथा जनता और लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच संबंध और मजबूत होंगे। उन्होंने राज्य विधानमंडलों के बीच नवाचार और संस्थागत सुधारों को लेकर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का आह्वान करते हुए कहा कि सभी विधानमंडलों को एक-दूसरे की सर्वोत्तम प्रक्रियाओं से सीखना और उन्हें साझा करना चाहिए।

लोकसभा अध्यक्ष ने लोकतांत्रिक संस्थाओं में युवाओं की अधिक भागीदारी पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत के युवा प्रौद्योगिकी, शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में आगे हैं और विधायी प्रक्रिया में उनकी भागीदारी से बेहतर नीतियां और कानून बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने गोवा विधानसभा की ओर से गोवा मुक्ति आंदोलन और राज्य की विधायी यात्रा को रेखांकित करने वाले चार दिवसीय कार्यक्रम आयोजित करने की पहल की सराहना की और कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं को लोकतांत्रिक संस्थाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

श्री बिरला ने कहा कि गोवा ने अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक पर्यावरण को संरक्षित करते हुए उद्योग, व्यापार, पर्यटन और शिक्षा के विकास के बीच सार्थक संतुलन बनाया है। गोवा की विकास यात्रा इसलिए विशिष्ट है क्योंकि राज्य को अपनी प्राकृतिक सुंदरता और विरासत को बचाते हुए आर्थिक विकास को भी आगे बढ़ाना पड़ा है।

उन्होंने कहा कि गोवा विधानसभा की रजत जयंती केवल पिछले 25 वर्षों की उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि अगले 25 वर्षों की दिशा तय करने का अवसर भी है। उन्होंने विधानसभा से युवाओं, महिलाओं और आम नागरिकों की अधिक भागीदारी के साथ 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण के अनुरूप अगले 25 वर्षों का दूरदर्शी रोडमैप तैयार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को भी यह महसूस होना चाहिए कि विधानसभा उसकी आकांक्षाओं और अपेक्षाओं का प्रतिनिधित्व करने वाला मंच है।

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