उज्जैन , अक्टूबर 10 -- मध्यप्रदेश की धार्मिक एवं प्राचीन नगरी उज्जैन में सर्वपितृ अमावस्या और शनिश्चरी अमावस्या के दुर्लभ संयोग पर शनिवार को मोक्षदायिनी शिप्रा नदी के घाटों पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सिद्धवट, त्रिवेणी घाट और गयाकोठा में सुबह से ही स्नान, तर्पण, पूजन और पितरों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला चलता रहा। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण कई मार्गों पर जाम की स्थिति बनी रही।
प्राचीन परंपरा के अनुसार, सर्वपितृ अमावस्या पर श्रद्धालु सिद्धवट घाट पर अपने पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और अन्य धार्मिक अनुष्ठान कर दान-पुण्य करते हैं। वहीं, शनिश्चरी अमावस्या पर उज्जैन-इंदौर फोरलेन स्थित त्रिवेणी घाट पर शिप्रा स्नान का विशेष महत्व है। यहां स्नान के बाद श्रद्धालु परंपरा के अनुसार अपने पहने हुए कपड़े, जूते-चप्पल आदि छोड़ जाते हैं। इन वस्तुओं की नीलामी से मंदिर प्रशासन को आय होती है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, लंबे समय बाद अश्विन मास में सर्वपितृ और शनिश्चरी अमावस्या का संयोग बनने से प्रदेश सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए त्रिवेणी घाट पर फव्वारों की व्यवस्था की गई थी। श्रद्धालु शुक्रवार रात से ही त्रिवेणी स्थित प्राचीन शनि मंदिर पहुंचने लगे थे और भगवान शनिदेव का पूजन-अभिषेक किया।
महाकालेश्वर की नगरी उज्जैन में स्थित इस प्राचीन शनि मंदिर में शनिदेव की विशेष पूजा-अर्चना की गई तथा उनका आकर्षक शृंगार किया गया। देर रात से ही शिप्रा में स्नान का सिलसिला शुरू हो गया था, जो सुबह तक जारी रहा।
दूसरी ओर, सिद्धवट घाट पर श्रद्धालुओं ने शिप्रा में स्नान कर पितरों के निमित्त तर्पण और धार्मिक अनुष्ठान किए तथा अपने आराध्य से सुख-समृद्धि की कामना की। खाक चौक स्थित गयाकोठा में भी सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। यहां सुबह से ही तर्पण और श्राद्ध कर्म का सिलसिला चलता रहा।
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