नयी दिल्ली , जून 20 -- दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ नरेश कुमार ने दिल्ली सरकार की मानसून तैयारियों पर सवाल उठाते हुए सर्वदलीय बैठक बुलाने और संयुक्त कार्य योजना बनाने की माँग की है।
डॉ. कुमार ने शनिवार को यहां संवाददाताओं से कहा कि प्रदेश सरकार के दावे बड़े-बड़े हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। दिल्ली सरकार अभी भी तैयारियों के मामले में सोयी हुई दिखाई दे रही है। हाल ही में 17 जून को दिल्ली के उपराज्यपाल टीएस संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अलग-अलग बैठकें कीं, जो इस बात का संकेत है कि दोनों के बीच तालमेल का गंभीर अभाव है।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भी मुख्यमंत्री और मंत्री प्रवेश वर्मा सड़कों पर उतरकर बड़े-बड़े दावे कर रहे थे, लेकिन पहली ही बारिश ने उन दावों की पोल खोल दी थी। राजधानी का लुटियंस ज़ोन तक जलमग्न हो गया था। इससे पहले अरविंद केजरीवाल सरकार के दौरान भी मिंटो रोड सहित कई इलाकों में जलभराव की भयावह तस्वीरें सामने आयी थीं।
उन्होंने कहा कि अभी भी समय है। दिल्ली सरकार को तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए। साथ ही उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री को सभी संबंधित मंत्रियों तथा एजेंसियों के साथ संयुक्त बैठक कर एक समग्र कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए कि आने वाले मानसून में दिल्लीवासियों को किस प्रकार सुरक्षित रखा जायेगा।
डॉ. नरेश कुमार ने कहा कि बाढ़ विभाग के 77 नालों की सफाई का काम अभी तक पूरी तरह नहीं हुआ है। दिल्ली में 37 एसटीपी प्लांट हैं, जिनमें से 14 बंद पड़े हैं। इसके अलावा 59 नए प्लांट लगाए जाने थे, लेकिन सरकार इस विषय पर खामोश है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के लगभग 13,692 छोटे-बड़े नाले हैं, जिनकी कुल लंबाई लगभग 6,600 किलोमीटर है। इनकी सफाई को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हैं। सरकार दावा कर रही है कि 1.20 लाख टन गाद निकाली गयी है। यदि वास्तव में इतनी गाद निकाली गयी है, तो सरकार बताए कि उसे कहाँ डाला गया? क्या इसका किसी स्वतंत्र एजेंसी से थर्ड पार्टी ऑडिट कराया गया? इस विषय पर भी सरकार मौन है।
उन्होंने कहा कि यमुना किनारे बसी कॉलोनियों के लिए सरकार की क्या योजना है? जलस्तर बढ़ने पर ये क्षेत्र जलमग्न हो जाते हैं। लोगों के लिए पीने के पानी, सुरक्षित निकासी (इवैक्यूएशन) और मेडिकल कैंप की क्या व्यवस्था होगी, इस पर कोई स्पष्ट योजना दिखाई नहीं देती।
डॉ. कुमार ने कहा कि अनधिकृत कॉलोनियों में जलभराव एक स्थायी समस्या है। वहाँ पानी निकासी के क्या इंतज़ाम हैं? दिल्ली के ग्रामीण और शहरीकृत गाँवों में सीवर जाम हैं, सड़कें टूटी हुई हैं, लेकिन सरकार इन समस्याओं पर भी खामोश है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में एमसीडी, पीडब्ल्यूडी, दिल्ली जल बोर्ड, डीडीए तथा सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग जैसी अनेक एजेंसियाँ काम करती हैं, लेकिन इनके बीच समन्वय का अभाव है। इसके लिए एक यूनिफाइड कमांड सिस्टम बनाया जाना चाहिए ताकि सभी एजेंसियाँ एकजुट होकर काम कर सकें।
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