बेलग्रेड , अक्टूबर 26 -- सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिच ने मध्यावधि संसदीय चुनाव में पराजय स्वीकार कर ली है। भ्रष्टाचार विरोधी छात्र आंदोलन ने निर्णायक जीत हासिल करते हुए सत्तारूढ़ सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी (एसएनएस) के 14 साल के शासन का अंत कर दिया है।

श्री वुसिच ने बेलग्रेड में एसएनएस मुख्यालय में कहा, "यह स्पष्ट है कि हम ये चुनाव हार गए हैं।"सर्बिया के चुनाव आयोग के अनुसार, 96 प्रतिशत मतदान केंद्रों की मतगणना पूरी होने तक छात्र आंदोलन की 'स्टूडेंट लिस्ट' को 22.4 लाख वोट मिले, जबकि पूर्व सत्तारूढ़ पार्टी को 16.7 लाख वोट मिले। शुरुआती आंकड़ों में छात्र समर्थित आंदोलन को 52.65 प्रतिशत और एसएनएस को 39.2 प्रतिशत मत मिलने की जानकारी दी गई।

बेलग्रेड, नोवी साद और अन्य शहरों में नतीजों के बाद जश्न मनाया गया। सड़कों पर लोगों ने नाचकर जीत का उत्सव मनाया। आंदोलन के प्रमुख उम्मीदवार इलिया स्र्दानोविच ने कहा, " यह एक स्वतंत्र देश होगा।" उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य "देश को अत्याचार से मुक्त कराना था। "बेलग्रेड विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर नेबोशा व्लादिसावलजेविक ने कहा, "यह कोई साधारण चुनावी जीत नहीं है, बल्कि ऐसी सुनामी है जिसने एक सत्तावादी शासन और पूरे राजनीतिक परिदृश्य को मिटा दिया है।"उन्होंने कहा कि स्टूडेंट लिस्ट ने आने वाले वर्षों में सरकार चलाने के लिए 'पूर्ण वैधता' हासिल की है।

छात्र आंदोलन का उदय दो साल से भी कम समय पहले नोवी साद रेलवे स्टेशन पर एक छतरीदार ढांचे के ढहने की घटना के बाद हुआ था। इस हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई थी। प्रदर्शनकारियों ने इसके लिए कथित भ्रष्टाचार और लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए जवाबदेही की मांग की थी। श्री वुसिच सरकार ने इन आरोपों से इनकार किया है।

दो साल तक चले प्रदर्शनों के बाद श्री वुसिच ने मध्यावधि चुनाव की घोषणा की थी। उनका लक्ष्य फिर से प्रधानमंत्री पद हासिल करना था, जिसे उन्होंने 2017 में छोड़ दिया था। राष्ट्रपति के रूप में दो कार्यकाल पूरे कर चुके श्री वुसिच तीसरी बार इस पद के लिए चुनाव नहीं लड़ सकते थे।

स्टूडेंट लिस्ट का कोई स्पष्ट नेता नहीं है और उसके पास चुनावी राजनीति का सीमित अनुभव है। इसके बावजूद उसने सर्बिया भर के सरकार विरोधी मतदाताओं को एकजुट किया। संसद की 250 सीटों के लिए उसके उम्मीदवारों में डॉक्टर, अभिनेता, शिक्षाविद और खेल जगत की हस्तियां शामिल थीं।

आंदोलन ने भ्रष्टाचार विरोधी एजेंडे के तहत उन अधिकारियों को हटाने का वादा किया, जिन्होंने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करते हुए नियमों का उल्लंघन किया था। इसके अलावा, सरकारी कंपनियों को पार्टी के वफादारों के नियंत्रण से मुक्त करने और सार्वजनिक प्रसारक को राजनीतिक हस्तक्षेप से बचाने का भी वादा किया गया।

जीत के बाद अपने संबोधन में उम्मीदवार रादोमिर सैसिच ने कहा कि मतदाताओं ने दिखा दिया है कि उनकी इच्छाशक्ति से बड़ी कोई बाधा नहीं है। उन्होंने कहा, " जो लोग अपनी नियति अपने हाथों में लेने का फैसला कर चुके हैं, उन पर कोई भी ताकत हमेशा हावी नहीं रह सकती।"बेलग्रेड में जश्न मना रहीं सेलेना लेबोविच ने नतीजे को 'वाकई शानदार' बताया। उन्होंने कहा, "हम सभी रो रहे हैं। क्या कहें, हमें विश्वास नहीं हो रहा था कि यह इतना आसान होगा।" प्रदर्शनों के केंद्र रहे उत्तरी शहर नोवी साद में डेविड वासिच ने कहा, "अब सब कुछ बेहतर होगा।"चुनाव परिणामों पर यूरोप के विभिन्न नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी। यूरोपीय संघ की विस्तार आयुक्त मार्ता कोस ने कहा कि सर्बिया के लिए "एक नया अध्याय शुरू हो सकता है।" उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ के दरवाजे खुले हैं और वह सर्बिया के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार है।

हंगरी के प्रधानमंत्री पीटर मग्यार ने भी छात्र आंदोलन की जीत का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि स्टूडेंट लिस्ट के नेताओं से यह सुनकर उन्हें खुशी हुई कि अप्रैल में उनकी पार्टी की जीत से उन्हें काफी ताकत मिली थी। मग्यार की पार्टी ने विक्टर ओर्बान के 16 साल के शासन का अंत किया था। एसएनएस 2012 से सर्बिया की सत्ता में थी।

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने रूस के साथ संबंधों में श्री वुसिच के योगदान की सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि सर्बिया की 'नयी राजनीतिक ताकत' यह समझेगी कि रूस के साथ सहयोग देश के हित में है। उन्होंने कहा, "लेकिन जैसा कि आप जानते हैं, ताली बजाने के लिए दो हाथ चाहिए।"श्री वुसिच ने सर्बिया की यूरोपीय संघ की सदस्यता की कोशिश का समर्थन किया था, लेकिन यूक्रेन पर रूस के व्यापक सैन्य हमले के बाद रूस पर प्रतिबंध लगाने से इनकार किया था। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने पेंशन और सरकारी कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि के साथ सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश बढ़ाने का भी वादा किया था।

चुनाव के दौरान तनाव का माहौल बना रहा। बेलग्रेड में गणराज्य निर्वाचन आयोग के आसपास की सड़कों को पुलिस ने बंद कर दिया था। सर्बिया के विभिन्न मतदान केंद्रों के साथ-साथ स्लोवेनिया, जर्मनी और अमेरिका जैसे देशों में भी लंबी कतारें देखी गईं, जहां सर्बियाई समुदाय बड़ी संख्या में रहता है। पेरिस में मतदाताओं ने भारी बारिश के बीच अपनी बारी का इंतजार किया।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि स्टूडेंट लिस्ट की ओर से प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी कौन संभालेगा। राष्ट्रपति चुनाव दिसंबर में होने हैं। इस बीच संसद की अध्यक्ष आना ब्रनाबिच कार्यवाहक व्यवस्था में भूमिका निभा रही हैं।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित