बैतूल , जून 26 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिला अस्पताल में आधुनिक भवन, ट्रॉमा सेंटर और ऑपरेशन थिएटर उपलब्ध होने के बावजूद आवश्यक सर्जिकल सामग्री के अभाव में पिछले लगभग छह वर्षों से हड्डी के ऑपरेशन बंद पड़े हैं। इसके चलते फ्रैक्चर और अन्य गंभीर मामलों के मरीजों को निजी अस्पतालों अथवा भोपाल रेफर किया जा रहा है।

अस्पताल सूत्रों के अनुसार जिला अस्पताल में दो हड्डी रोग विशेषज्ञ पदस्थ हैं, लेकिन कोविड काल के बाद से प्लेट, स्क्रू, नेल तथा अन्य आवश्यक सर्जिकल सामग्री की आपूर्ति बंद होने के कारण ऑर्थोपेडिक सर्जरी नहीं हो पा रही है। वर्तमान में मरीजों को केवल प्राथमिक उपचार और प्लास्टर की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

बताया गया कि वर्ष 2019 तक जिला अस्पताल में फ्रैक्चर, रीढ़ तथा अन्य हड्डी संबंधी अधिकांश ऑपरेशन नियमित रूप से किए जाते थे। नए अस्पताल भवन में स्थानांतरण और कोविड महामारी के बाद आवश्यक सामग्री की आपूर्ति बाधित हो गई, जो अब तक बहाल नहीं हो सकी है।

भोपाल-नागपुर तथा बैतूल-इंदौर फोरलेन मार्गों पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के कारण प्रतिदिन बड़ी संख्या में हड्डी संबंधी मरीज अस्पताल पहुंचते हैं। प्रतिदिन 10 से 12 मरीज ऑर्थोपेडिक उपचार के लिए आते हैं, जिनमें से अधिकांश को ऑपरेशन की आवश्यकता होने पर निजी अस्पतालों या भोपाल भेजना पड़ता है। हर माह लगभग 200 से 250 मरीजों को बाहर उपचार कराना पड़ रहा है।

अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. रूपेश पद्माकर ने बताया कि यदि ऑपरेशन के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा दी जाए तो जिला अस्पताल में लगभग 90 प्रतिशत ऑर्थोपेडिक ऑपरेशन पुनः शुरू किए जा सकते हैं।

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