अलवर , अक्टूबर 27 -- राजस्थान में अलवर जिले के सरिस्का बाघ अभयारण्य के बफर क्षेत्र में इन दिनों बाघिनों और उनके शावकों की अठखेलियां पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई हैं।

यहां आने वाले पर्यटकों को जंगल के प्राकृतिक वातावरण में बाघिनों और शावकों को करीब से देखने का रोमांचक अनुभव मिल रहा है। दो अक्टूबर से बारा -लीवारी और अंधेरी बफर मार्ग पर लगातार बाघों के दीदार हो रहे हैं। इससे सरिस्का के बफर क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को नया उत्साह मिला है और अब देशी पर्यटकों के साथ विदेशी पर्यटक भी यहां पहुंच रहे हैं।

वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बाघिन एसटी-23 अपने दो शावकों और बाघिन एसटी-19 अपने चार शावकों के साथ पर्यटकों को दिखाई दे रही हैं। हाल ही में शाम के समय अंधेरी बफर मार्ग पर सफारी के दौरान बाघिन एसटी-23 अपने दोनों शावकों के साथ अठखेलियां करती नजर आई। इस खूबसूरत नजारे को पर्यटकों ने अपने कैमरे में कैद किया। जंगल के बीच मां बाघिन और शावकों की गतिविधियों को देखना पर्यटकों के लिए याद्गार अनुभव बन रहा है। वन्यजीव फोटोग्राफरों के लिए भी यह क्षेत्र खास आकर्षण बनता जा रहा है, जहां उन्हें बाघों की प्राकृतिक गतिविधियों को कैमरे में उतारने का अवसर मिल रहा है।

वन्यजीव फोटोग्राफर हिमांशु शर्मा सहित अन्य फोटोग्राफरों ने अंधेरी बफर मार्ग पर सफारी के दौरान बाघिन और शावकों की गतिविधियों को कैमरे में कैद किया। फोटोग्राफरों का कहना है कि सरिस्का के बफर क्षेत्र में उन्हें जिस तरह के फोटो खींचने के अवसर मिले, वह अनुभव बेहद खास रहा। उनका मानना है कि यहां वन्यजीवों का लगातार नजर आना फोटोग्राफी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है और ऐसे नजारों को देखने के लिए दोबारा सरिस्का आना चाहेंगे।

सरिस्का के अंधेरी बफर ट्रैक पर सफारी करने पहुंचे एक पर्यटक ने भी अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि वह पहली बार सरिस्का में बाघों को देखने के लिए आए थे और उनका अनुभव बेहद शानदार रहा। सफारी के दौरान उन्हें एक बाघिन और उसके दो शावकों सहित कुल तीन बाघ दिखाई दिए। उन्होंने इसे अद्भुत अनुभव बताते हुए कहा कि सरिस्का का बफर क्षेत्र घूमने और खोज करने लायक है। उन्होंने वन्यजीव फोटोग्राफरों को भी अवसर मिलने पर यहां आने की सलाह दी।

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