अलवर , अक्टूबर 16 -- राजस्थान में अलवर में सरसों और चने की बुवाई का सीजन नजदीक आने के साथ ही कृषि जिंसों के बाजार में तेजी का रुख किसानों के लिए राहत भरी खबर लेकर आया है।
सरसों और चने के मौजूदा भाव पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर बने हुए हैं। अलवर मंडी में सरसों के भाव 8600 से 8700 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं, जबकि चना 7250 से 7300 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर कारोबार कर रहा है। अच्छे बाजार भाव को देखते हुए किसानों में आगामी फसल को लेकर उत्साह है। अगले 15 से 20 दिनों में सरसों की बुवाई शुरू होने की संभावना है। ऐसे में बाजार की मौजूदा स्थिति पर किसानों, व्यापारियों और तेल मिल संचालकों की नजर बनी हुई है।
भारतीय उद्योग व्यापार संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और अलवर के प्रमुख व्यापारी सुरेश चंद्र अग्रवाल जलालपुरिया ने सरसों, चना, ग्वार सहित अन्य कृषि जिंसों के बाजार भाव, उपलब्ध स्टॉक और आगामी बुवाई को लेकर विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस बार सरसों और चने का स्टॉक अपेक्षाकृत कम है। चने के बाजार में पिछले वर्ष की तुलना में करीब 1500 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी देखने को मिल रही है। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्पादन और आयात से जुड़ी परिस्थितियों का भी बाजार पर असर पड़ा है। चने के मौजूदा भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से ऊपर बने हुए हैं, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है।
अलवर जिले में सरसों प्रमुख कृषि फसलों में शामिल है। बुवाई का समय नजदीक आने के साथ किसान मौसम, बीज, लागत और बाजार भाव को ध्यान में रखकर फसल की तैयारी में जुटेंगे। फिलहाल मंडी में सरसों के 8600 से 8700 रुपये प्रति क्विंटल के भाव किसानों के लिए उत्साहजनक हैं। हालांकि, आगामी दिनों में बाजार का रुख उत्पादन, मौसम, आवक और मांग जैसे कारकों पर निर्भर करेगा। ऐसे में किसान बुवाई के साथ-साथ फसल की लागत और संभावित मुनाफे का आकलन भी कर रहे हैं।
श्री जलालपुरिया ने बताया कि राजस्थान में अलवर और भरतपुर सरसों उत्पादन के प्रमुख केंद्र हैं। इन जिलों में बड़ी संख्या में तेल मिलें और प्रसंस्करण इकाइयां संचालित हैं। यहां उत्पादित सरसों से तेल तैयार करके देश के विभिन्न हिस्सों में आपूर्ति की जाती है। सरसों की उपलब्धता और तेल की मांग का सीधा प्रभाव मंडियों में जिंस के भाव पर पड़ता है। यही वजह है कि अलवर के बाजार में सरसों की कीमतों में होने वाले बदलाव पर किसान, व्यापारी और मिल संचालक विशेष नजर रखते हैं।
सरसों के ऊंचे भाव के पीछे शुद्ध सरसों तेल की बढ़ती मांग को भी एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। जलालपुरिया के मुताबिक, उपभोक्ता सोयाबीन, पाम ऑयल और राइस ब्रान ऑयल जैसे दूसरे खाद्य तेलों के मिश्रण वाले उत्पादों की जगह शुद्ध सरसों तेल को प्राथमिकता दे रहे हैं। उनके अनुसार, शुद्ध सरसों तेल की खपत बढ़ने से तेल मिलों की मांग को सहारा मिल रहा है, जिसका असर सरसों के बाजार भाव पर भी दिखाई दे रहा है।
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