अम्बिकापुर , अप्रैल 20 -- छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में बढ़ती गर्मी और लू के प्रकोप को देखते हुए पशुपालन विभाग ने पशुपालकों और किसानों के लिए आज परामर्श जारी किया है।
विभाग ने चेतावनी दी है कि अत्यधिक तापमान के कारण पशुओं में ''हीट स्ट्रोक'' (लू लगना) का खतरा बढ़ गया है, जिससे उनकी कार्यक्षमता और दुग्ध उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
अतिरिक्त उपसंचालक पशुपालन डॉ. सी.के. मिश्रा ने बताया कि थोड़ी सी सावधानी बरतकर पशुपालक अपने पशुओं को इस भीषण गर्मी से सुरक्षित रख सकते हैं और आर्थिक नुकसान से बच सकते हैं।
परामर्श में पशुओं के लिए ठंडी एवं हवादार जगह पर आवास की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। शेड के ऊपर टाट, घास डालने या सफेद पेंट करने से तापमान कम किया जा सकता है। साथ ही शेड में पंखे या कूलर का उपयोग करने तथा दोपहर के समय पशुओं को सीधे धूप में न बांधने की सलाह दी गई है।
विभाग ने पशुओं को दिन में कम से कम तीन से चार बार ठंडा और स्वच्छ पानी पिलाने, पानी में इलेक्ट्रोलाइट, नमक या गुड़ का घोल मिलाकर देने तथा दिन में एक से दो बार स्नान कराने की भी सलाह दी है। इसके अलावा पशुओं को सुबह और शाम के ठंडे समय में चारा देने तथा आहार में हरे चारे की पर्याप्त मात्रा शामिल करने पर बल दिया गया है।
परामर्श में बताया गया है कि तेज सांस लेना, हांफना, मुंह खोलकर सांस लेना, लार टपकना, शरीर का अत्यधिक गर्म होना या पशु का सुस्त होकर गिर जाना हीट स्ट्रोक के प्रमुख लक्षण हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर पशु को तुरंत छाया में ले जाकर उसके सिर और गर्दन पर ठंडा पानी डालने तथा नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
पशुपालन विभाग ने अपील की है कि भीषण गर्मी के इस दौर में पशुधन की विशेष देखभाल करें, क्योंकि लापरवाही से उनकी उत्पादन क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
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