अंबिकापुर , अगस्त 08 -- छत्तीसगढ़ में सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड के दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में मलेरिया का प्रकोप सामने आया है। पिछले करीब एक माह के दौरान क्षेत्र में प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम (पीएफ) मलेरिया के 39 मरीजों की पहचान हुई है। वहीं उदयपुर से लगे लखनपुर विकासखंड के एक गांव में एक ही परिवार के पांच सदस्य भी मलेरिया संक्रमित पाए गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रभावित इलाकों में लगातार स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं और बुखार से पीड़ित ग्रामीणों के रक्त के नमूने लेकर मलेरिया की जांच की जा रही है। मतरिंगा, खर्रानगर, मुसरडांड, मुकना पहाड़, बारो पहाड़, बकोई और सेमी घोघरा समेत अन्य दूरस्थ गांवों में संक्रमण के मामले सामने आए हैं। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पहाड़ी कोरवा और पंडो समुदाय के लोग निवास करते हैं।

उदयपुर के दूरस्थ क्षेत्र में मलेरिया के पहले मरीज की पहचान 6 जून को हुई थी। 26 जुलाई 2026 की रिपोर्ट तक 31 मामले सामने आए थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 39 हो गई है। संक्रमितों में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं। जांच में सभी मरीज प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम मलेरिया से पीड़ित पाए गए।

सरगुजा मख्य चिकित्सा अधिकारी पीएस मार्को ने बताया कि प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम ज्यादा घातक होता है। इससे ज्यादा जल्दी ब्लड एचबी कम होता है और चक्कर आने लगते हैं। इलाज न मिलने पर यह घातक हो सकता है।

उन्होंने बताया कि प्रभावित गांव पहाड़ों पर बसे हैं और स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार वहां पहुंचकर ग्रामीणों की जांच कर रही हैं। बुखार से पीड़ित लोगों के ब्लड सैंपल लिए जा रहे हैं तथा मलेरिया संक्रमित पाए जाने पर तत्काल उपचार शुरू किया जा रहा है। गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर इलाज कराया गया है।

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक अब तक 44 मरीजों की पहचान की गई है, जिनमें से ज्यादातर का उपचार पूरा हो चुका है। वर्तमान में करीब 4 से 5 मरीजों का उपचार जारी है, जबकि बाकी मरीज स्वस्थ हो चुके हैं।

श्री मार्को ने बताया कि उदयपुर ब्लॉक से सटे लखनपुर ब्लॉक के एक गांव में करीब 10 दिन पहले एक ही परिवार के पांच लोग मलेरिया पीड़ित मिले थे। सभी का उपचार किया गया है।

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