नयी दिल्ली , मार्च 07 -- वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि आज भारत जो भी व्यापार समझौते कर रहा है , सभी हितधारकों के साथ परामर्श के साथ और अपने हित में कर रहा है तथा अमेरिका ने भारत के साथ जो समझौता किया वह भारत के प्रतिस्पर्धी देशों के साथ उसके समझौतों की तुलना में बेहतर है।
श्री गोयल ने कहा , ' भारत और अमेरिका के संबंध मजबूत और बहुआयामी हैं। यह केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें प्रौद्योगिकी सहयोग, महत्वपूर्ण खनिजों में साझेदारी और रक्षा सहयोग भी शामिल हैं।
उन्होंने भारत-अमेरिका साझेदारी को दो भविष्य को परिभाषित करने वाले दो देशों की साझेदारी बताते हुए कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के बारे में कहा कि इसमें अमेरिका की ओर से की गयी पेशकश पर पूरा भरोसा जताया। उन्होंने कहा, "हमें सभी प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले सबसे अच्छा समझौता मिला है।"उन्होंने कार्यक्रम के संचालक के साथ सवाल जवाब के दौरान कहा कि आज वह एफटीए के लिए जो भी बातचीत करता है उसमें उनका एक ही "मंत्र" रहता है- अंतरराष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं और घरेलू उद्योगों की संवेदनशीलताओं के बीच संतुलन बना रहे।' श्री गोयल ने यह भी कहा कि वह 2019 से वाणिज्य एवं उद्योग विभाग संभाल रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उनके काम पर पूरा भरोसा है।
श्री गोयल ने कहा कि पिछली सरकारों के विपरीत, वर्तमान सरकार हर एफटीए से पहले सभी हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) से व्यापक परामर्श को प्राथमिकता देती है, ताकि किसी भी स्थानीय उद्योग को नुकसान न पहुंचे।
उन्होंने अक्टूबर 2019 में बैंकाक में क्षेत्रीय व्यापक भागीदारी समझौते (आरसीईपी) से हटने के प्रधानमंत्री मोदी के फैसले बाहर निकलने के फैसले को याद करते हुए गोयल ने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्ववाली तात्कालिक सरकार ने हितधारकों से बिना पूछे भारत को इस समझौता वार्ता में फंसा दिया था। मूल रूप से आरसीईपी चीन के सामान को भारतीय बाजार में आने का "पिछला दरवाजा" बन सकता था।
वाणिज्य मंत्री ने कहा, ' उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि यहां कोई भी मानता होगा कि इससे भारत में रोजगार, आर्थिक गतिविधि या निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को फायदा होता। यह विनाशकारी होता। ।"उन्होंने कहा कि वाणिज्य मंत्री का पद संभालने के बाद उन्होंने 20219 में जून से अक्टूबर के बीच पूरे देश में हितधारकों के साथ 200 से अधिक बैठकें की थी। इस दौरान केवल तीन लोगों ने आरसीईपी वार्ता का समर्थन किया था1 उसके बाद उस साल अक्टूबर में श्री मोदी ने बैंकाक में स्पष्ट रूप से इस समझौते को भारत के हित के विरुद्ध बताते हुए इससे अलग होने की घोषणा की थी।
श्री गोयल ने कहा कि भारत आज विकसित देशों के साथ व्यापार समझौते कर रहा है जो भारतीय अर्थव्यवस्था के पूरक की भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने चार यूरोपीय देशों स्विट्जरलैंड, नार्वे, लिकटेंस्टाइन और आईलैंड के मुक्त वयापार संघ- ईएफटीए के साथ हुए समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि ये देश उपभोग की सारी चीजें पहले से शुल्क मुक्त आयात करते हैं। ऐसे में वे भारत को व्यापार के मामले में कुछ खास प्रस्तुत करने की स्थिति में नहीं थे, भारत ने इस समझौते में उनसे 100 अरब डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई ) की प्रतिबद्धता ली है।उन्होंने यह भी कहा कि यदि यह निवेश नहीं होता, तो भारत को समझौते के तहत दिए गए लाभ वापस लेने का अधिकार होगा।
वाणिज्य मंत्री ने कहा कि यह 100 अरब डॉलर का एफडीआई कुल 500 अरब डॉलर के निवेश में बदलेगा जिससे 50 लाख रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
गोयल ने कहा कि इसी प्रकार की रणनीति न्यूजीलैंड और ब्रिटेन के साथ किये गये समझौतों के मामले में भी अपनायी गयी है।
उन्होंने कहा कि हमने इन देशों को समझाया कि 2047 तक भारत आठ गुना बढ़ कर 30 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेगा और उन्हें इन साझेदारियों से भाविष्य में भारत के साथ कहीं और बड़े बाजार के अवसर मिलेंगे हैं।
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