नयी दिल्ली , मार्च 25 -- पश्चिम एशिया संकट से उपजे हालात पर सरकार ने बुधवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई जिसमें सभी दलों ने स्थिति से निपटने को लेकर एकजुटता दिखाई लेकिन विपक्ष ने कहा कि इस मुद्दे पर संसद में चर्चा होनी चाहिए।
विपक्ष के कई दलों ने कहा कि हालात से निपटने पर सरकार के प्रयास पूरी तरह से संतोषजनक नहीं हैं। कांग्रेस ने बैठक ने सरकार के जवाब को असंतोषजनक बताया और कहा कि संसद में नियम 193 और 176 के तहत इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की जानी चाहिए। विपक्षी दलों ने बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गैर मौजूदगी पर भी सवाल उठाए।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में करीब डेढ़ घंटे चली बैठक में सभी दलों के प्रतिनिधिगयों ने भाग लिया। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू के अनुसार बैठक में केवल तृणमूल कांग्रेस ने भाग नहीं लिया। खुद उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के नेताओं से दो बार बैठक में आने का अनुरोध किया, लेकिन उन्हें बताया गया कि उसके नेता कहीं और यात्रा पर जा रहे हैं।
बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस.जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी समेत कई वरिष्ठ मंत्री मौजूद रहे। कांग्रेस की ओर से तारिक अहमद, मुकुल वासनिक, मणिक्क टैगोर, जेडीयू से ललन सिंह और संजय झा, समाजवादी पार्टी की डिम्पल यादव, धर्मेद्र यादव तथा अन्य दलों के नेता बैठक में शामिल हुए।
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं ने बैठक में हिस्सा लिया और एकजुटता का भाव प्रदर्शित किया। बैठक का मक़सद सभी राजनीतिक दलों को स्थिति की जानकारी देना और एक साझा रणनीति पर चर्चा करना था। बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने वैश्विक हालात और पश्चिम एशिया के संकट पर विस्तार से जानकारी दीश्री रिजिजू ने कहा कि सरकार ने बैठक में भ्रम की स्थिति का स्पष्ट रूप से स्पष्टीकरण दिया। इसका परिणाम रहा कि बैठक के अंत में विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने के लिए सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि ऐसी कठिन और चुनौतीपूर्ण स्थिति में हम सभी को एकजुट रहना होगा।
पश्चिम एशियाई देशों में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट की और बताया कि भारतीय दूतावास लगातार सक्रिय हैं और अब तक करीब 4.25 लाख भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। सरकार ने यह भी कहा कि वह सभी संबंधित देशों के संपर्क में है और हालात पर लगातार करीबी नजर रखी जा रही है।
बैठक के माहौल पर संसदीय कार्य मंत्री ने कहा "मेरा मानना है कि सरकार द्वारा आज इस सर्वदलीय बैठक में दी गई विस्तृत जानकारी और प्रश्नों के उत्तर के बाद मेरा विश्वास है कि पूरा विपक्ष संकट के समय एकजुट होकर खड़ा रहेगा। एक तरह से, मैंने सभी विपक्षी दलों में एकजुटता की भावना भी देखी। मुझे लगता है कि विपक्षी दल ने बैठक के अंत में यह कहकर परिपक्वता दिखाई है कि किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति में वे सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के साथ खड़े रहेंगे। कई विपक्षी सदस्य होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से गैस और पेट्रोलियम आपूर्ति के विवरण जानना चाहते थे लेकिन सरकार द्वारा बताई गई स्थिति और सरकार के इस दिशा में किया जा रहे प्रयासों से विपक्ष के नेता संतुष्ट थे।"गौरतब है कि पश्चिम एशिया की स्थिति पर बयान देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद कहा था किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति में भारतीय संसद को एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बैठक में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने पहले ही स्पष्ट किया था कि केरल में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के चलते वे इसमें शामिल नहीं हो पाएंगे, हालांकि उन्होंने केंद्र की विदेश नीति पर सवाल उठाए।
बैठक में कांग्रेस के मुकुल वासनिक ने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के भंडार को लेकर जानकारी मांगी, जबकि तारिक अनवर ने सरकार के जवाब को पूरी तरह संतोषजनक नहीं बताते हुए संसद में नियम 193 और नियम 176 के तहत विस्तृत चर्चा की मांग की।
समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए, जिस पर सरकार ने कहा कि पाकिस्तान का ऐसा रुख नया नहीं है। पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भी सरकार की तैयारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि ईरान से जुड़े हालात का असर देश के भीतर भी पड़ सकता है और इसके लिए पहले से ठोस रणनीति जरूरी थी।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने बैठक में प्रधानमंत्री की गैरमौजूदगी पर भी सवाल उठाए गए। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि अतीत में ऐसे संकटों के दौरान प्रधानमंत्री स्वयं बैठकों में शामिल होते रहे हैं।
इस बीच विपक्ष के आरोपों पर भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि ऐसे समय में राजनीतिक बयानबाजी से बचना चाहिए। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि सरकार पूरी जिम्मेदारी के साथ हालात संभाल रही है और सभी को एकजुट रहना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ नेता देशहित से ऊपर राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं।
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