चंडीगढ़ , अप्रैल 07 -- शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) द्वारा नामित उप-समिति ने मंगलवार को एक पत्र के माध्यम से पंजाब सरकार से आग्रह किया है कि वह बेअदबी विरोधी कानून के प्रस्तावित मसौदे या संशोधनों के विवरण को तुरंत एसजीपीसी के साथ साझा करे और उन्हें सिख समुदाय के लिए सार्वजनिक करे, ताकि उचित सुझाव दिए जा सकें।

एसजीपीसी के सहायक सचिव और उप समिति के समन्वयक लखवीर सिंह ने बताया कि सोमवार को तेजा सिंह समुद्री हॉल, अमृतसर में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा बुलायी गयी पंथिक एकत्रता (सभा) के दौरान की गयी घोषणाओं और प्रस्तावों तथा एसजीपीसी के अध्यक्ष द्वारा प्रेस में दिये गये बयानों के आलोक में, गठित उप-समिति (सब-कमेटी) की एक आपातकालीन बैठक आज चंडीगढ़ स्थित एसजीपीसी के उप-कार्यालय में आयोजित की गयी। बैठक के दौरान यह देखा गया कि पंजाब के मुख्यमंत्री और उनके प्रतिनिधियों द्वारा जारी विभिन्न बयानों के अनुसार, श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी और गुरबानी से संबंधित बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए कानून में संशोधन करने के लिए 13 अप्रैल को पंजाब विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाया गया है। इस सिलसिले में, पंजाब सरकार ने 'पंजाब प्रिवेंशन ऑफ ऑफेंसेज अगेंस्ट होली स्क्रिप्चर्स बिल, 2025' के संबंध में एसजीपीसी से सुझाव मांगे थे। तीन सितंबर, 2025 से एसजीपीसी द्वारा बार-बार किये गये पत्राचार के बावजूद,न तो आवश्यक कार्रवाई के बारे में सूचित किया गया और न ही सरकार या विधानसभा द्वारा कोई उचित पत्राचार बनाये रखा गया। अब, मीडिया के माध्यम से 'जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी सत्कार एक्ट, 2008'में प्रस्तावित संशोधनों के संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार, अनिश्चितता और भ्रम की स्थिति बनी हुई है, जिससे सिख समुदाय के भीतर सरकार की मंशा पर संदेह पैदा हो रहा है। सरकार ने प्रस्तावित संशोधनों का कोई मसौदा (ड्राफ्ट) या विवरण शिरोमणि समिति के साथ साझा नहीं किया है।

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