नयी दिल्ली , जुलाई 15 -- रक्षा मंत्रालय ने भारत-पाकिस्तान सीमा पर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सर क्रीक सेक्टर में भारतीय सेना की संचालन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए तेज गति वाली स्वदेशी एम्फीबियस नौकाओं की खरीद के लिए प्रस्ताव मांगे हैं।
इन नौकाओं से सर क्रीक के कठिन दलदली इलाके में आवागमन, निगरानी और घुसपैठ विरोधी अभियानों में सुधार आने की उम्मीद है।रक्षा सूत्रों के अनुसार इन नौकाओं की खरीद 'खरीदें (भारतीय)' श्रेणी के तहत की जा रही है, जिसमें न्यूनतम 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री अनिवार्य है। खरीद प्रस्तावाें के मिलने के बाद अनुबंध पर हस्ताक्षर होने के 24 महीने के भीतर विजेता कंपनी को इन नौकाओं की आपूर्ति करनी होगी।
सूत्रों ने कहा कि अभी 11 नौकाओं की खरीद का प्रस्ताव है और इनमें से ज्यादातर को गुजरात के कच्छ क्षेत्र में तैनाती के लिए भारतीय सेना में शामिल किए जाने की संभावना है। इसके अलावा कुछ नौका मुंबई और पोर्ट ब्लेयर से संचालन के लिए भारतीय नौसेना को दिये जाने की उम्मीद है, जिससे सर क्रीक सेक्टर और अंडमान और निकोबार कमान दोनों में संचालन क्षमता बढ़ेगी।
इन नौकाओं को जमीन और पानी दोनों जगह निर्बाध रूप से संचालित करने के लिए डिजाइन किया जा रहा है और इन्हें सेना की इंजीनियर कोर द्वारा संचालित किया जाएगा, जिनकी विशेष सैपर इकाइयां सर क्रीक क्षेत्र में संचालन के लिए जिम्मेदार हैं। इस क्षेत्र में कीचड़ और उथले पानी में पारंपरिक सैन्य वाहनों और मानक गश्ती नौकाओं के लिए आवाजाही मुश्किल हो जाती है।
नयी नौकाओं से दलदल में गतिशीलता बढने की उम्मीद है। सूत्रों ने कहा कि यह क्षमता सुरक्षा बलों को दुर्गम इलाकों में गश्त करने, छोटी टीमों को तुरंत तैनात करने, घुसपैठ के प्रयासों को रोकने और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी अभियान जारी रखने में सक्षम बनाएगी। इन नौकाओं पर लगभग 1,560 किलोग्राम की पेलोड क्षमता के साथ चालक दल के दो सदस्यों सहित कम से कम 12 सैनिकों के सवार होने की उम्मीद है। इनमें उन्नत संचार और नौवहन प्रणालियों के साथ-साथ गोला-बारूद और हथगोले के भंडारण के लिए सुरक्षित जगह भी होगी।
लंबे समय तक तैनाती के दौरान इन्हें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड निगरानी प्रणाली, रडार, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस), स्वचालित पहचान प्रणाली (एआईएस) और एक जाइरो कंपास से लैस किया जायेगा।
लड़ाकू भूमिकाओं के लिए, नौकाओं में बैलिस्टिक सुरक्षा और हथियार लगाने के प्रावधान किये जायेंगे। ये पानी में 40 समुद्री मील प्रति घंटे से अधिक तथा जमीन पर 10 से 15 किमी प्रति घंटे की गति से चलने में सक्षम होंगी। इन्हें भारी टैंक ट्रांसपोर्टरों के साथ-साथ भारतीय वायु सेना के आईएल -76 और सी-17 रणनीतिक एयरलिफ्ट विमानों द्वारा परिचालन थिएटरों में तेजी से तैनाती के लिए ले जाया जा सकता है।
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