नयी दिल्ली , जुलाई 31 -- सरकार ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना को 2030-31 तक जारी रखने का निर्णय लेते हुए इसके लिए 3.15 लाख करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय को मंजूरी दी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। योजना के तहत पात्र भू-स्वामी किसान परिवारों को प्रतिवर्ष 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जाती है। सरकार ने किसानों के हित में इस योजना की शुरुआत फरवरी 2019 में की थी।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बैठक के बाद यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बताया कि किसानों की समृद्धि ही राष्ट्र की समृद्धि की आधारशिला है और इसी उद्देश्य से पात्र किसान परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली के माध्यम से समयबद्ध एवं पारदर्शी आय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इससे किसानों को कृषि निवेश बढ़ाने और उनकी आजीविका सुदृढ़ करने में मदद मिल रही है।

उन्होंने बताया कि आधार प्रमाणीकरण, डिजिटल सत्यापन और सुदृढ़ डीबीटी प्रणाली के कारण यह योजना पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही का प्रभावी उदाहरण बनी है।

श्री वैष्णव ने कहा कि योजना के तहत अब तक 23 किस्तों के माध्यम से किसानों के बैंक खातों में 4.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित की जा चुकी है। 23वीं किस्त के तहत 9.49 करोड़ से अधिक किसानों को 18,984 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की गई। कोविड-19 महामारी के दौरान किसानों को 1.71 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई। योजना के तहत महिला किसानों को 1.06 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सहायता मिली है तथा लगभग प्रत्येक चार लाभार्थियों में एक महिला किसान है।

उन्होंने कहा कि पीएम-किसान योजना के तहत मिलने वाली सहायता से किसानों को बीज, उर्वरक, सिंचाई, कृषि मशीनरी तथा अन्य कृषि आवश्यकताओं पर समय पर निवेश करने में मदद मिली है। इससे उनकी उत्पादक क्षमता बढ़ी है, अनौपचारिक स्रोतों से ऋण पर निर्भरता घटी है तथा ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (डीएमईओ) सहित विभिन्न स्वतंत्र संस्थानों के आकलन में योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। डीएमईओ के अनुसार 92 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों ने सहायता राशि का उपयोग कृषि गतिविधियों और कृषि निवेश में किया, जबकि लगभग 85 प्रतिशत लाभार्थियों ने कृषि आय में वृद्धि तथा अनौपचारिक ऋण पर निर्भरता कम होने की पुष्टि की।

सरकार का कहना है कि वर्ष 2020-21 से 2025-26 के दौरान खेती का रकबा लगभग 9.65 प्रतिशत, उत्पादकता 10.53 प्रतिशत तथा कुल खाद्यान्न उत्पादन 21.18 प्रतिशत बढ़ा जो किसानों को मिल रहे व्यापक सहयोग और कृषि क्षेत्र की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है। श्री वैष्णव ने कहा कि आधार आधारित प्रमाणीकरण, डिजिटल लाभार्थी सत्यापन और डीबीटी प्रणाली के माध्यम से पीएम-किसान योजना डिजिटल इंडिया के प्रभावी उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण बन गई है। यह योजना केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों के आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और कृषि निवेश की क्षमता को भी सुदृढ़ कर रही है।

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