भोपाल , मार्च 20 -- मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने में कम समय शेष रहने के बावजूद सरकार करीब एक तिहाई बजट खर्च नहीं कर पाई है और शेष राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ सकती है।
माकपा के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने बयान जारी कर कहा कि वर्ष 2025-26 के लिए विभिन्न विभागों को 3.31 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, लेकिन 15 मार्च तक 1,09,515 करोड़ रुपये खर्च नहीं हुए, जो कुल बजट का लगभग 33 प्रतिशत है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि शेष अवधि में यह राशि खर्च भी की जाती है तो वह विकास कार्यों के बजाय कागजी औपचारिकताओं में सिमटकर नेताओं, मंत्रियों, अधिकारियों और बिचौलियों तक ही सीमित रह जाएगी।
उन्होंने कहा कि इससे सरकार का गरीब विरोधी चेहरा उजागर होता है, क्योंकि जिन विभागों में अधिक खर्च की आवश्यकता थी, वहीं सबसे कम बजट उपयोग हुआ है। अनुसूचित जाति विभाग द्वारा 42.89 प्रतिशत राशि खर्च नहीं किए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे वंचित वर्गों के हित प्रभावित होंगे।
माकपा नेता ने बताया कि ग्रामीण विकास विभाग ने 56.18 प्रतिशत और पंचायत विभाग ने 49.09 प्रतिशत बजट खर्च नहीं किया है, जिससे गांव और गरीबों के प्रति सरकार का रवैया स्पष्ट होता है। उन्होंने यह भी कहा कि शहरी विकास विभाग 34.66 प्रतिशत तथा स्वास्थ्य विभाग 30.07 प्रतिशत राशि खर्च नहीं कर सका है, जबकि इन क्षेत्रों में गंभीर चुनौतियां बनी हुई हैं। लोक निर्माण विभाग द्वारा 28.74 प्रतिशत बजट खर्च नहीं किए जाने का भी उल्लेख किया गया।
उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार लगातार कर्ज ले रही है, वहीं दूसरी ओर महत्वपूर्ण विभाग आवंटित राशि खर्च नहीं कर पा रहे हैं, जो प्रशासनिक अक्षमता को दर्शाता है। माकपा ने आरोप लगाया कि इससे स्पष्ट होता है कि प्रदेश सरकार अक्षम और भ्रष्ट है।
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