पटना , मई 20 -- ामान्य प्रशासन विभाग के अंतर्गत विभागीय जांच निदेशालय के मुख्य जांच आयुक्त दीपक कुमार सिंह ने बुधवार को कहा कि किसी भी सरकारी सेवक के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई उसके किए अपराध के अनुरूप ही होना चाहिए। श्री सिंह ने आज बिहार स्टेट पॉवर होल्डिंग कंपनी में तैनात पदाधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बेली रोड स्थित विद्युत भवन के सभागार में आयोजित बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के अनुप्रयोग पर आयोजित उन्मुखीकरण कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि अनुशासनिक प्राधिकार, प्रस्तुतीकरण और संचालन पदाधिकारी को यह ध्यान देना होगा कि जिस भी लोकसेवक के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की जा रही है, उसका आधार क्या है और उसे अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया है या नहीं। इसे नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के अनुरूप ही करना चाहिए।

मुख्य जांच आयुक्त ने कहा कि सरकारी सेवक के खिलाफ की जाने वाली अनुशासनिक कार्रवाई की दिशा में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 का अनुपालन ही नैसर्गिक न्याय का अनुपालन होगा। उन्होंने प्रशिक्षुओं को बताया कि अनुशासनिक कार्रवाई में जा रही प्रक्रियात्मक त्रुटि की वजह से ही अधिकांश मामले न्यायालय से खारिज होते हैं। इसलिए संबंधित पदाधिकारियों को उपलब्ध कराई गई पुस्तक के नियमावली को पढ़ना जरूरी है।

श्री कुमार ने कहा कि इससे पहले सचिवालय और विभागों के पदाधिकारियों को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 पर प्रशिक्षण दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि विद्युत विभाग में पदाधिकारी और कर्मियों की संख्या अधिक है, इसलिए उनके लिए अलग से उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

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