चंडीगढ़ , अक्टूबर 22 -- केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषधि विभाग के सहयोग से पीएचडी चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री की स्वास्थ्य समिति और चंडीगढ़ चेप्टर ने बुधवार को यहां गुड मैन्यूफैक्चरिंग प्रैक्टिस के माध्यम से औषधि गुणवत्ता आश्वासन में वृद्धि विषय पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन और संशोधित औषधि प्रौद्योगिकी उन्नयन सहायता योजना (आरपीटीयूएएस) पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया जिसमें उद्योग और नियामक निकायों के बीच अनुपालन और सहयोग की संस्कृति को बढ़ावा देने के महत्व पर बल दिया गया। पीएचडीसीसीआई की क्षेत्रीय औषधि, स्वास्थ्य एवं कल्याण समिति के संयोजक, सुप्रीत सिंह ने उद्योग और रैगुलेटरी निकायों के बीच अनुपालन और सहयोग की संस्कृति को बढ़ावा देने के महत्व पर जोर दिया। पंजाब के सहायक औषधि आयुक्त,अमित दुग्गल ने नियामक निगरानी बढ़ाने और निर्माताओं को वैश्विक जीएमपी प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए राज्य द्वारा की जा रही वर्तमान पहलों के बारे में बताया। हरियाणा के राज्य औषधि नियंत्रक ललित गोयल ने एमएसएमई फार्मा इकाइयों के लिए राज्य के बेहतर माहौल पर चर्चा की और प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से क्षमता वृद्धि के लिए सहयोग को प्रोत्साहित किया। सरकार के औषधि विभाग के अवर सचिव धर्मेंद्र कुमार यादव ने पीएलआई और आरपीटीयूएएस योजनाओं सहित राष्ट्रीय नीतिगत पहलों का अवलोकन प्रस्तुत किया और भारतीय फार्मा निर्माताओं को वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप लाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
आईपीए पंजाब के अध्यक्ष डॉ.भूपिंदर सिंह भूप ने अपने संबोधन में जीएमपी मानकों को मजबूत करने में शिक्षा जगत और उद्योग जगत के बीच साझेदारी के बारे में जानकारी दी।
सिडबी के प्रबंधक यशवंत शिंदे ने आरपीटीयूएएस योजना पर एक गहन प्रस्तुति दी, जिसमें उन्होंने योजना के वित्तीय सहायता ढांचे, पात्रता मानदंडों सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के तरीकों के बारे में बताया।
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