अल्मोड़ा , सितंबर 16 -- उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (उपपा) ने प्रदेश में सरकारी भूमि की बिक्री, नीलामी और दीर्घकालीन लीज की प्रक्रियाओं पर तत्काल रोक लगाने तथा उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (यूआईआईडीबी) को तत्काल भंग करने की मांग की है।
पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष पी.सी. तिवारी के नेतृत्व में अपर जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री को इस संबंध में ज्ञापन प्रेषित किया गया।
पार्टी ने बुधवार को कहा कि निवेश और रोजगार के नाम पर सरकारी विभागों की भूमि को निजी एवं व्यावसायिक परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराने की प्रक्रिया गंभीर चिंता का विषय है। पार्टी के अनुसार होटल, रिसॉर्ट, स्पा एवं वेलनेस सेंटर, आवासीय कॉलोनियों तथा अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए सरकारी भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रियाएं आगे बढ़ रही हैं और करीब 7,000 बीघा सरकारी भूमि से जुड़े प्रस्तावों पर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
पार्टी ने मांग की कि सरकार अब तक सरकारी भूमि के आवंटन, बिक्री, नीलामी और लीज से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक करते हुए इस पर श्वेतपत्र जारी करे, जिसमें यह स्पष्ट हो कि किस विभाग की कितनी भूमि, किसे, किस उद्देश्य और किन शर्तों पर दी गई है। साथ ही पूर्व में हुए आवंटनों व लीज की पारदर्शी एवं उच्चस्तरीय समीक्षा की भी मांग की गई।
पार्टी का कहना है कि निवेश के नाम पर भूमि दिए जाने की स्थिति में स्थानीय युवाओं, उद्यमियों, महिला समूहों, सहकारी संस्थाओं तथा छोटे-मध्यम कारोबारियों को प्राथमिकता देनी चाहिए और किसी भी बड़े प्रोजेक्ट से पहले स्थानीय समुदाय व जनप्रतिनिधियों की भागीदारी एवं जनहित का परीक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
ज्ञापन देने वालों में पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष नारायण राम, केंद्रीय सचिव किरण आर्य, एडवोकेट गोपाल राम, एडवोकेट मनोज पंत सहित मोहम्मद साकिब, वंदना कोहली, हीरा देवी, पूजा आर्या, पार्वती थापा, त्रिभुवन शर्मा, रोहित बिष्ट, तौसीफ खान, सिमरन सहित पार्टी के अनेक कार्यकर्ता एवं समर्थक शामिल रहे।
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