नैनीताल , अगस्त 05 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं और डॉक्टरों के स्थानांतरण से उत्पन्न स्थिति के मामले में बुधवार को सुनवाई करते हुए स्वास्थ्य सचिव को 12 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की रिपोर्ट के आधार पर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने राज्य सरकार से पूछा कि बड़े पैमाने पर डॉक्टरों के स्थानांतरण किए जा रहे हैं, लेकिन उनकी जगह नए चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए क्या व्यवस्था की जा रही है।

न्यायालय ने सरकार से इस संबंध में विस्तृत योजना और सुझाव भी प्रस्तुत करने को कहा है।

यही नहीं अदालत ने नैनीताल स्थित सेनेटोरियम अस्पताल को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के रूप में विकसित करने के संबंध में पूर्व में दिए गए निर्देशों की प्रगति रिपोर्ट भी एक सप्ताह के भीतर पेश करने का आदेश दिया।

राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि इस परियोजना के लिए 250 करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार कर सरकार को भेजी जा चुकी है और बजट स्वीकृति के लिए मामला वित्त विभाग के पास लंबित है। बजट स्वीकृत होने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

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