उज्जैन , अप्रैल 10 -- मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने विश्वविद्यालय परिसर को अतिक्रमण मुक्त करने और अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्णय लिया है।

कुलगुरु अर्पण भारद्वाज की अध्यक्षता में आयोजित आपात बैठक में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गरिमा बनाए रखने और संपत्तियों के संरक्षण को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि जो लोग विश्वविद्यालय की सेवा में नहीं हैं, उनसे आवास तत्काल खाली कराए जाएंगे। साथ ही अवैध कब्जाधारियों से बाजार दर के अनुसार राशि वसूलने के लिए अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि कार्यपरिषद ने परिसर को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाई है, जिसके तहत अवैध रूप से रह रहे लोगों को हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

बैठक में कंप्यूटर विज्ञान संस्थान के व्याख्याता डॉ. रामजी यादव की सेवा समाप्ति का निर्णय भी लिया गया। इंदौर स्थित उच्च न्यायालय की खंडपीठ द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई है।

डॉ. यादव की नियुक्ति वर्ष 1996 में हुई थी, जिसे नियमों और आरक्षण प्रावधानों के विपरीत पाया गया। न्यायालय ने विश्वविद्यालय के निर्णय को सही ठहराते हुए नियुक्ति निरस्त करने को वैध माना, हालांकि 17 वर्षों की सेवा को देखते हुए वेतन वसूली पर रोक लगाई गई है।

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