जयपुर , मई 05 -- देश के विधान मंडलों की समिति प्रणाली की समीक्षा के लिए लोकसभा द्वारा गठित सात पीठासीन अधिकारियों की उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट को आगामी जून में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को प्रस्तुत कर दिया जायेगा।

राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष डॉ वासुदेव देवनानी मंगलवार को यहां समिति की दूसरी बैठक के बाद यह बात कही। उन्होंने कहा कि आवश्यक हुआ तो रिपोर्ट प्रस्तुत करने से पहले एक बैठक और आयोजित कर रिपोर्ट पर अंतिम चर्चा की जा सकती है। उन्होंने बताया कि सभी राज्यों की समिति की कार्य प्रणाली का अध्ययन कर लिया गया है। समितियों को सक्रिय किये जाने की आवश्यकता है। बैठक में तय किया गया है कि इस उच्च स्तरीय समिति द्वारा तैयार की जाने वाली रिपोर्ट को जून में श्री बिरला को प्रस्तुत कर दिया जायेगा।

श्री देवनानी ने बताया कि देश में सभी राज्यों के विधान मण्डलों की समितियों की कार्यप्रणाली में एकरूपता लाने के लिए समितियों के विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि विधान मंडली की समितियां सदन का लघु रूप होती है। समितियों में विधायकों की भागीदारी बढाने, उन्हें प्रभावी बनाने, उनके द्वारा किये जाने वाले परीक्षणों की प्रक्रिया की समान बनाने, समितियों की रिपोर्ट पर राज्य सरकारों द्वारा कार्रवाई और प्रतिवेदनों पर सदन में चर्चा कराने पर विचार विमर्श हुआ।

उन्होंने बताया कि बैठक में देश के विधान मंडलों की समितियों को सशक्त बनाने के लिए समिति प्रणाली पर मंथन हुआ। उन्होंने बताया कि लोकतंत्र में संसद एवं विधानसभा की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। लोकतंत्र की जीवंतताओं और परम्पराओं का अधिक विकसित करने के लिए सभी विधानमण्डलों की समितियों की कार्यप्रणाली में एकरुपता लाया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समितियां आमजन को न्याय दिलाने में अग्रणी भूमिका निभाती है और यह संसदीय शोध में भी सहायक होती है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित