लखनऊ , मार्च 17 -- उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अवध प्रांत की बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें संगठन विस्तार, सामाजिक समरसता और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
13 से 15 मार्च तक हरियाणा के समालखा में आयोजित अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के संदर्भ में मंगलवार को यहां संघ कार्यालय में संवाद केंद्र प्रबुद्ध वर्ग बैठक आयोजित की गई। इसमें संगठन कार्य के विस्तार, राष्ट्रहित में समाज की सज्जन शक्ति को सक्रिय करने और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।
प्रांत संघचालक सरदार स्वर्ण सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में हिंदू समाज को जाति और पंथ के आधार पर विभाजित करने के प्रयास हो रहे हैं, ऐसे में संत रविदास जी के जीवन संदेश को अपनाते हुए समाज की एकता के लिए कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि समाज में श्रेष्ठ कार्यों को जाति-पंथ से ऊपर उठकर स्वीकार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संघ के स्वयंसेवकों द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में व्यापक संपर्क अभियान चलाया जा रहा है। अवध प्रांत में 350वें वर्ष के उपलक्ष्य में 2000 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जबकि 24 स्थानों पर विशेष आयोजन कर 10 हजार से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की गई।
सह प्रांत कार्यवाह संजय सिंह ने बताया कि विभिन्न कार्यकर्ताओं के सहयोग से कार्यक्रमों की सफलता सुनिश्चित हुई है और संगठन का कार्य समाज की अंतिम इकाई तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि संघ के प्रयासों से समाज में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।
श्री सिंह ने बताया कि अवध प्रांत में कुल 2888 मंडल/बस्तियों में से 2860 में शाखाएं लग रही हैं और 2728 स्थानों पर हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया गया है। कुल 18993 गांवों में से 15864 गांवों में संपर्क किया गया, जबकि सामाजिक समरसता की 294 बैठकों और 124 केंद्रों पर प्रमुख जन गोष्ठियां आयोजित की गईं।
आगे की योजना के तहत युवा पीढ़ी को जोड़ने, समाज परिवर्तन के प्रयासों को तेज करने और अधिक से अधिक स्थानों पर शाखाएं खड़ी करने का लक्ष्य रखा गया है। बैठक में संघ की 100 वर्ष की यात्रा के अवसर पर समाज में जागरूकता बढ़ाने का भी आह्वान किया गया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा-2026 में संत शिरोमणि संत रविदास जी के 650वें प्राकट्य वर्ष के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके विचारों को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया गया।
सभा में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले द्वारा जारी वक्तव्य में कहा गया कि भारत की संत परंपरा ने समाज में समरसता और एकता को मजबूत किया है। संत रविदास ने अपने जीवन में भक्ति, सेवा और मानवता के माध्यम से समाज में व्याप्त भेदभाव और कुरीतियों को समाप्त करने का प्रयास किया।
वक्तव्य में कहा गया कि संत रविदास ने समाज में ऊंच-नीच के भेद को नकारते हुए समानता और सामाजिक परिवर्तन का संदेश दिया। उन्होंने अपने विचारों और आचरण से समाज को नई दिशा दी और भक्ति आंदोलन के माध्यम से सामाजिक समरसता को सशक्त बनाया।
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