रायपुर , मार्च 18 -- हरियाणा के समालखा में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में संगठन के कार्यों की समीक्षा के साथ आगामी दिशा तय की गई। तीन दिवसीय इस बैठक में देशभर से आए पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिसमें संघ के विस्तार, सुदृढ़ीकरण और शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों पर विशेष चर्चा हुई।
रायपुर में आज क्षेत्र संघचालक डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना और प्रांत संघचालक टोपलाल वर्मा ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि बैठक में देशभर से 1400 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए। इस दौरान संगठन के कार्यों के विस्तार और समाज जीवन में उसकी भूमिका को लेकर व्यापक समीक्षा की गई।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में देश के अधिकांश जिलों और खंडों में संघ की सक्रिय उपस्थिति है। देशभर में 55 हजार से अधिक स्थानों पर लगभग 89 हजार शाखाएं संचालित हो रही हैं, जिनमें विद्यार्थी और युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। इसके अलावा साप्ताहिक मिलन और संघ मंडलियों के माध्यम से भी संगठन का कार्य विस्तार किया जा रहा है।
सेवा कार्यों के तहत हजारों सेवाबस्तियों में गतिविधियां संचालित हो रही हैं, जिनमें से बड़ी संख्या में बस्तियां अब शाखा युक्त हो चुकी हैं। प्रशिक्षण वर्गों के माध्यम से भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को तैयार किया गया है।
प्रांत स्तर पर छत्तीसगढ़ में संघ का विस्तार उल्लेखनीय बताया गया। यहां 34 जिलों के 1600 से अधिक स्थानों पर 2,188 शाखाएं लग रही हैं। इनमें विद्यार्थी, तरुण, व्यावसायी और बाल शाखाओं की सक्रिय भूमिका है। साप्ताहिक मिलन और संघ मंडलियों के माध्यम से भी कार्यकर्ताओं का जुड़ाव बढ़ा है।
रायपुर महानगर को 14 नगरों में विभाजित कर 130 से अधिक बस्तियों में 200 से अधिक शाखाएं संचालित की जा रही हैं। वहीं प्रांत में प्रशिक्षण वर्गों में हजारों स्वयंसेवकों ने भागीदारी निभाई है।
संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर व्यापक स्तर पर गृह संपर्क अभियान चलाया गया। इसके तहत देशभर में करोड़ों परिवारों तक पहुंचकर संगठन की विचारधारा और समाज परिवर्तन के विषयों को साझा किया गया। छत्तीसगढ़ में भी लाखों घरों तक संपर्क स्थापित किया गया।
सांस्कृतिक एकता और सामाजिक समरसता के उद्देश्य से देशभर में हजारों हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए, जिनमें करोड़ों लोगों की भागीदारी रही। छत्तीसगढ़ में भी हजारों कार्यक्रमों के जरिए बड़ी संख्या में लोगों को जोड़ा गया।
उन्होंने बताया कि बैठक में मणिपुर की स्थिति, बस्तर क्षेत्र में घटते नक्सल प्रभाव और पड़ोसी देशों की परिस्थितियों पर भी विचार-विमर्श हुआ। इसके साथ ही विभिन्न सामाजिक संगठनों के कार्यों और नवाचारों की जानकारी भी साझा की गई।
उन्होंने बताया कि संघ की अगली अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक अक्टूबर-नवंबर में इंदौर में आयोजित की जाएगी, जिसमें देशभर से प्रतिनिधि शामिल होंगे।
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