रायपुर , सितंबर 11 -- छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के क्रियान्वयन को लेकर गठित राज्य स्तरीय उच्च स्तरीय समिति ने विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और आयोगों के प्रतिनिधियों से चर्चा कर सुझाव लिए। दो दिवसीय परामर्श बैठक में विवाह-तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप सहित विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

राजधानी के पुराने सर्किट हाउस में 10 और 11 सितंबर को आयोजित बैठक की अध्यक्षता समिति के सदस्य एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी एम.के. राउत ने की। समिति के सदस्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार भी मौजूद रहे। बैठक में पीपीटी के माध्यम से समान नागरिक संहिता से संबंधित मौजूदा नियमों और कानूनों की जानकारी दी गई।

गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति के प्रांतीय सचिव गजानंद नुरूटी ने आदिवासी समाज की रूढ़िगत परंपराओं और विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान की रक्षा का मुद्दा उठाते हुए आदिवासी समुदाय को समान नागरिक संहिता के दायरे से अलग रखने का अनुरोध किया।

राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा ने लैंगिक समानता पर जोर देते हुए महिला और पुरुष को समान अधिकार, बेटे-बेटी को संपत्ति में बराबर उत्तराधिकार, विवाह एवं तलाक का अनिवार्य पंजीयन तथा संपत्ति और वसीयत से जुड़े स्पष्ट कानूनी प्रावधान बनाने का सुझाव दिया।

क्रिश्चियन समाज के प्रतिनिधि राजेश जॉन पाल सहित अन्य प्रतिनिधियों ने कहा कि उनके समाज में विवाह को ईश्वर द्वारा बनाई गई अटूट जोड़ी माना जाता है। प्रतिनिधियों ने लिव-इन संबंधों को लेकर भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई।

राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने बच्चों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर सुझाव दिए। समिति ने कहा कि विभिन्न सामाजिक समूहों से मिले सुझावों और व्यावहारिक तथ्यों का विश्लेषण कर समावेशी, संतुलित और निष्पक्ष मसौदा तैयार करने की दिशा में विचार किया जाएगा।

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