अलवर , जून 30 -- राजस्थान सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में प्रक्रिया तेज करते हुए राज्य और जिला स्तर पर समितियों का गठन किया है।

जिला कलेक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला ने मंगलवार को बताया कि ये समितियां जनसुनवाई के माध्यम से लोगों के सुझाव लेकर कानून का प्रारूप तैयार करेंगी। आम नागरिक भी यूसीसी के प्रारूप को अधिक समावेशी और पारदर्शी बनाने के लिए अपनी राय ऑनलाइन साझा कर सकते हैं। इच्छुक नागरिक अपने सुझाव दर्ज करा सकते हैं। सरकार का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों की भागीदारी से राज्य की आवश्यकताओं और सामाजिक ताने-बाने के अनुरूप एक प्रगतिशील एवं संतुलित कानून तैयार करना है।

डाॅ शुक्ला ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद-44 के तहत राज्य का दायित्व है कि वह सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करे। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने यूसीसी लागू करने की प्रक्रिया शुरू की है।उन्होंने कहा कि प्रस्तावित समान नागरिक संहिता में विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे नागरिक मामलों को एक समान कानून के दायरे में लाने का प्रस्ताव है। वर्तमान में अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं, जिससे कई मामलों में असमानता की स्थिति बनती है।

उन्होंने बताया कि यूसीसी का प्रमुख उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून लागू करना और विशेष रूप से महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव को समाप्त करके उन्हें पुरुषों के समान अधिकार सुनिश्चित करना है। प्रस्तावित कानून में विवाह एवं तलाक का अनिवार्य पंजीकरण, बहुविवाह पर पूर्ण रोक, लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीकरण और पैतृक संपत्ति में बेटा और बेटी को समान अधिकार जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए जाने का प्रस्ताव है।

राज्य सरकार का कहना है कि व्यापक जनभागीदारी के आधार पर तैयार होने वाला यह कानून सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और नागरिकों के समान अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। व्यापक जनभागीदारी के आधार पर तैयार होने वाला यह कानून सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और नागरिकों के समान अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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