चंडीगढ़ , जुलाई 07 -- ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) ने गुरुग्राम और नूंह के लिए प्रस्तावित समानांतर (पैरालल) बिजली वितरण लाइसेंस का कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि आठ जुलाई को हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) में होने वाली सुनवाई के दौरान इस प्रस्ताव को खारिज करने की मांग की जाएगी।

एआईपीईएफ के मीडिया सलाहकार वी. के. गुप्ता ने मंगलवार को बताया कि फेडरेशन के मुख्य संरक्षक इंजी. परमजीत सिंह आयोग के समक्ष संगठन का पक्ष रखेंगे। उनके साथ हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव इंजी. रविंद्र सिंह घंघास तथा पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव इंजी. अजयपाल सिंह अटवाल भी सुनवाई में शामिल होंगे।

फेडरेशन ने एचईआरसी के समक्ष विस्तृत आपत्ति याचिका दाखिल करते हुए कहा है कि गुरुग्राम और नूंह जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए आवेदन करने वाली निजी कंपनी एम/एस इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड का गठन लगभग एक वर्ष पहले हुआ है और उसकी चुकता पूंजी मात्र एक करोड़ रुपये है। एआईपीईएफ का दावा है कि ऐसी कंपनी की तकनीकी क्षमता, वित्तीय मजबूती और परिचालन अनुभव पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

फेडरेशन ने कहा कि गुरुग्राम और नूंह क्षेत्र से हर महीने लगभग 777 करोड़ रुपये का बिजली राजस्व प्राप्त होता है और यह दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएनएल) के कुल राजस्व का करीब 27.5 प्रतिशत योगदान देता है। ऐसे में लाभकारी उपभोक्ताओं को निजी कंपनी के हवाले करना सार्वजनिक बिजली वितरण कंपनी की वित्तीय स्थिति को कमजोर कर सकता है। एआईपीईएफ का कहना है कि यदि औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ता निजी कंपनी के पास चले गये तो क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था प्रभावित होगी, आम उपभोक्ताओं पर बिजली दरों का दबाव बढ़ेगा, राज्य सरकार की सब्सिडी का बोझ बढ़ेगा और ग्रामीण तथा कृषि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक असर पड़ेगा।

फेडरेशन ने यह भी कहा कि हरियाणा में अभी तक समानांतर वितरण लाइसेंस से जुड़े उपभोक्ता स्थानांतरण, सुरक्षा जमा, बकाया वसूली, कर्मचारी संरक्षण और शिकायत निवारण जैसी व्यवस्थाओं के लिए कोई स्पष्ट नियामकीय ढांचा नहीं है। ऐसे में बिना आवश्यक नियम बनाये किसी भी समानांतर लाइसेंस को मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए।

इस बीच हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन (एचपीईए) के बैनर तले राज्य के विभिन्न जिला मुख्यालयों पर बिजली इंजीनियरों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि जब छोटे सरकारी कार्य भी ई-टेंडर प्रक्रिया से कराये जाते हैं तो गुरुग्राम और नूंह जैसे लाभकारी बिजली वितरण क्षेत्रों को बिना पारदर्शी प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के निजी कंपनी को देने का प्रयास क्यों किया जा रहा है। एआईपीईएफ ने दोहराया कि बिजली केवल व्यावसायिक वस्तु नहीं, बल्कि एक आवश्यक सार्वजनिक सेवा है। फेडरेशन ने एचईआरसी से उपभोक्ताओं, कर्मचारियों और सार्वजनिक बिजली उपक्रमों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस आवेदन को अस्वीकार करने की मांग की है।

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