यमुनानगर , अक्टूबर 22 -- ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने कहा है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को कैबिनेट बैठक बुलाकर घोषणा करनी चाहिए कि प्रदेश में कहीं भी समानांतर वितरण लाइसेंस की अनुमति नहीं दी जाएगी।

बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के संबंध में बातचीत में श्री दुबे ने कहा कि फेडरेशन ने हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए हैं और इलेवन पावर को दिए गए लाइसेंस की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि केवल अपीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी में अपील दायर करने तक सीमित रहने के बजाय सरकार को इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 के तहत मिली वैधानिक शक्तियों का उपयोग करना चाहिए और जनहित में इन लाइसेंस को रद्द कराने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए। बिजली उपभोक्ताओं और कर्मचारियों के व्यापक विरोध के बावजूद समानांतर लाइसेंस दिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।

श्री दुबे ने कहा कि एचईआरसी के चेयरमैन मुकेश गर्ग के नेतृत्व में गुरुग्राम और नूंह के लिए इलेवन पावर को समानांतर वितरण लाइसेंस दिया जाना कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। बिजली जैसी आवश्यक जनसेवा से जुड़े फैसलों में मिलीभगत का संदेह गंभीर चिंता का विषय है। राज्य सरकार को तुरंत हस्तक्षेप कर पूरे मामले की समीक्षा और निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच करानी चाहिए।

उन्होंने जोर देकर कहा कि बिजली कर्मचारी और इंजीनियर किसानों और उपभोक्ताओं के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध हैं और सभी वर्गों को 24 घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना उनका उद्देश्य है। समानांतर वितरण लाइसेंस के विरोध में ही कर्मचारियों को हड़ताल पर जाना पड़ा।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हड़ताल के दौरान किसी बिजली कर्मचारी या इंजीनियर को परेशान किया गया, निशाना बनाया गया या दंडात्मक कार्रवाई की गई तो अन्य राज्यों के बिजली कर्मचारी चुप नहीं बैठेंगे। ऐसी परिस्थितियों में हरियाणा में चल रहा आंदोलन पूरे देश में फैल सकता है, जिसके लिए हरियाणा सरकार जिम्मेदार होगी।

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