चंडीगढ़ , अक्टूबर 09 -- हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को समाधान शिविरों में आने वाली समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निपटारा किये जाने के निर्देश दिये।
उन्होंने कहा कि समाधान शिविर सरकार की फ्लैगशिप योजना है। अधिकारी नवीनतम तकनीक का इस्तेमाल करते हुए सुनिश्चित करें कि कोई भी शिकायत लंबित न रहे।
मुख्यमंत्री शुक्रवार को चंडीगढ़ में समाधान प्रकोष्ठ की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, मुख्यमंत्री के ओएसडी बीबी भारती, स्पेशल ऑफिसर भोपाल सिंह खदरी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। सभी जिलों के उपायुक्त और प्रशासनिक अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले एक वर्ष के दौरान समाधान शिविरों में कुल 92,848 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 55,365 का समाधान किया गया। समाधान की गुणवत्ता जांचने के लिए राज्य स्तर पर 40,000 शिकायतकर्ताओं से फोन पर संपर्क कर फीडबैक लिया गया। इसके अलावा, 11,500 शिकायतों को दोबारा खोलने के बाद उनका निपटारा किया गया।
उन्होंने कहा कि समाधान प्रकोष्ठ शिकायतों की दोहरी जांच और राज्य स्तरीय निगरानी का महत्वपूर्ण माध्यम है। शिकायतों को दोबारा खोलकर उनकी विस्तृत समीक्षा की जाती है और संबंधित शिकायतकर्ता से सीधे बात करके समाधान की स्थिति जानी जाती है। जिन जिलों में 35 प्रतिशत से अधिक शिकायतें दोबारा खोली गई हैं, उन्हें अपनी कार्यप्रणाली में सुधार कर राज्य के औसत स्तर तक आने के निर्देश दिए गए।
श्री सैनी ने कहा कि अधिकारी शिकायतों का केवल औपचारिक निपटारा करने के बजाय वास्तविक समाधान सुनिश्चित करें। लोगों से सीधे मिलकर उनकी समस्याएं विस्तार से सुनें, ताकि शिकायतों का स्थायी समाधान हो सके। प्रत्येक समाधान शिविर में जिम्मेदार अधिकारी की ड्यूटी लगाई जाए। निर्देशों की अनदेखी होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। शिविरों में स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के साथ कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) और प्रेस विज्ञप्तियां भी समय पर अपलोड की जाएं।
मुख्यमंत्री ने उपायुक्तों और एसडीएम को शिकायतों का स्वयं अध्ययन कर उनके निपटारे की समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी समस्या का समाधान नई नीति बनाने से संभव है, तो इस दिशा में कदम उठाए जाएंगे। इसके लिए वरिष्ठ अधिकारी 10 दिन के भीतर प्रत्येक जिले से 10 सुझाव भेजें, ताकि नीतिगत अड़चनों को दूर किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने सोनीपत, रोहतक, पानीपत, झज्जर, पंचकूला और सिरसा के उपायुक्तों से शिकायतों की स्थिति पर चर्चा की। अधिकारियों ने बताया कि कुछ शिकायतें डिमांड, प्रॉपर्टी आईडी और पुलिस से संबंधित हैं। मुख्यमंत्री ने डिमांड से जुड़ी समस्याओं को अलग कर मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए।
उन्होंने सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए सुबह के समय विशेष सफाई अभियान चलाने और सड़कों के गड्ढे भरने को कहा। स्थानीय निकायों को इसके लिए वाहन उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। निर्धारित मानकों के अनुसार सफाई के लिए वाहन उपलब्ध नहीं करवाने वाले ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने तालाबों से अवैध कब्जे हटाने और वहां बेहतर परियोजनाएं विकसित करने के लिए सुझाव भेजने के निर्देश भी दिए।
बैठक में मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव डॉ. यशपाल यादव, विशेष सचिव डॉ. प्रियंका सोनी, ओएसडी राकेश संधु, विवेक कालिया तथा मॉनिटरिंग एवं कोऑर्डिनेशन सेल के अधिकारी मौजूद रहे।
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