नयी दिल्ली , मार्च 23 -- केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को कहा कि समय से पहले जन्म (प्रीटर्म बर्थ) की समस्या से निपटने के लिए भारत में एक बड़ा कृत्रिम बौद्धिकता (एआई -आधारित अध्ययन किया जा रहा है।
डॉ सिंह ने बताया कि इस अध्ययन में 12,000 गर्भवती महिलाओं को शामिल किया गया है। यह शोध 'गर्भ-आईएनआई' पहल के तहत किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य प्रीटर्म जन्म की पहचान और रोकथाम के लिए स्वदेशी तकनीकी समाधान विकसित करना है।
दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री ने कहा कि समय से पहले जन्म नवजात मृत्यु और आगे चलकर कई बीमारियों का एक बड़ा कारण है। इसलिए भारत की परिस्थितियों के अनुसार समाधान विकसित करना बेहद जरूरी है।
इस अवसर पर श्री सिंह ने बताया कि इस अध्ययन के तहत 12,000 महिलाओं का डेटा इकट्ठा किया गया है, जिससे यह दक्षिण एशिया के सबसे बड़े प्रेग्नेंसी कोहोर्ट अध्ययनों में शामिल हो गया है। इसके तहत 16 लाख से अधिक बायो-सैंपल और 10 लाख से ज्यादा अल्ट्रासाउंड इमेज एकत्र किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि इस पहल के जरिए एआई आधारित गर्भावस्था डेटिंग मॉडल, प्रीटर्म जन्म के संकेतकों की पहचान, त्वरित जांच उपकरण और जोखिम का पहले से आकलन करने वाले सिस्टम विकसित किए गए हैं। इससे मातृ और शिशु स्वास्थ्य में सुधार होने की उम्मीद है।
डॉ सिंह ने इस पहल से जुड़े प्रमुख निष्कर्षों का एक संग्रह (कंपेंडियम) भी जारी किया गया। साथ ही, राष्ट्रीय बायो-रिपॉजिटरी और डेटा साझा करने का एक मंच भी तैयार किया गया है, जिससे शोधकर्ताओं को मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि मातृ और शिशु स्वास्थ्य देश के भविष्य से जुड़ा हुआ है। आज जन्म लेने वाले बच्चे ही 2047 में भारत की ताकत बनेंगे।
उन्होंने कहा कि ऐसे विज्ञान आधारित प्रयास भारत को न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में मजबूत बनाएंगे, बल्कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में भी अहम भूमिका निभाएंगे।
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