लखनऊ , मार्च 06 -- विश्व श्रवण दिवस पर संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में उन्नत न्यूरो-ओटोलॉजी प्रयोगशाला का शुभारंभ संस्थान के निदेशक डॉ. आरके धीमन ने किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि सुनने की कमी (बहरेपन) एक "मूक विकलांगता" है, जो धीरे-धीरे बढ़ती है, लेकिन समय पर पहचान और उपचार से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
एक दिन पूर्व रविवार को संस्थान में "कम्युनिटी टू क्लासरूम-हियरिंग केयर आफ इवरी चाइल्ड" थीम के तहत एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में सुनने की कमी की समय पर पहचान और शीघ्र उपचार के महत्व को रेखांकित करना था।
न्यूरोसर्जरी विभाग के न्यूरो-ओटोलॉजी यूनिट के प्रमुख डॉ. रवि शंकर और उनकी टीम ने बच्चों में श्रवण समस्याओं की समय रहते पहचान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यदि सुनने की समस्या का पता प्रारंभिक अवस्था में चल जाए तो इससे बच्चों के भाषण, भाषा विकास, संज्ञानात्मक क्षमता और सामाजिक विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने समुदाय की सक्रिय भागीदारी को भी इस दिशा में बेहद आवश्यक बताया।
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