नयी दिल्ली , जुलाई 07 -- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने मंगलवार को भारत-इंडोनेशिया समग्र रणनीतिक साझेदारी को नयी गति देने पर सहमति जतायी।

तीन दिन की यात्रा पर इंडोनेशिया गये श्री मोदी ने जकार्ता में श्री सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इस वार्ता के बाद जारी साझा वक्तव्य में कहा गया है कि दोनों नेताओं ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज, डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, अंतरिक्ष और शिक्षा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया। दोनों देशों ने नियमित शिखर बैठकें आयोजित करने, ब्रह्मोस मिसाइल सहयोग, रक्षा उपकरणों के संयुक्त उत्पादन, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग और साइबर सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की। दोनों पक्षों ने स्थानीय मुद्रा में व्यापार, सीमा-पार क्यूआर भुगतान, महत्वपूर्ण खनिजों, नवीकरणीय ऊर्जा और साबांग बंदरगाह के विकास सहित बुनियादी ढांचे में सहयोग बढ़ाने का भी निर्णय लिया। भारत और इंडोनेशिया ने मुक्त, खुला और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार, ब्रिक्स, जी20 और आसियान मंचों पर समन्वय बढ़ाने का समर्थन किया तथा आतंकवाद के सभी स्वरूपों की कड़ी निंदा करते हुए आतंक के वित्तपोषण और उग्रवादी नेटवर्क के खिलाफ शून्य-सहनशीलता की नीति पर जोर दिया।

दोनों नेताओं ने आतंकवाद के सभी रूपों की स्पष्ट और कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, व्यापक तरीके से आतंकवाद से निपटने के लिए निर्णायक और एकजुट अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित आतंकवादियों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद 1267 प्रतिबंध समिति की सूची में शामिल आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।

उन्होंने आतंकवाद और उससे जुड़े हिंसक चरमपंथ को रोकने और उसका मुकाबला करने में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। इसमें आतंकवादी फंडिंग को रोकने, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहमत मानकों को बढ़ावा देने, आतंकवादी उद्देश्यों के लिए नयी और उभरती तकनीकों के दुरुपयोग को रोकने, और आतंकवादियों की भर्ती (जिसमें ऑनलाइन भर्ती और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कट्टरपंथ फैलाना शामिल है) से निपटने के प्रयास शामिल हैं। दोनों नेताओं ने आतंकवाद से निपटने के लिए 'ज़ीरो-टॉलरेंस' (बिल्कुल बर्दाश्त न करने) के दृष्टिकोण का आह्वान किया।

मौजूदा भू- राजनीतिक स्थिति, आर्थिक और आपूर्ति शृंखला में रुकावटों और आपसी चिंता के वैश्विक मुद्दों को ध्यान में रखते हुए, दोनों नेताओं ने भारत और इंडोनेशिया के बीच ज़्यादा रणनीतिक तालमेल और करीबी सहयोग की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। यह सहयोग संयुक्त राष्ट्र और उसकी खास एजेंसियों समेत कई-पक्षीय और क्षेत्रीय मंचों पर, एक ज़्यादा संतुलित और सभी की भागीदारी वाली विश्व व्यवस्था बनाने के लिए ज़रूरी है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित हो और क्षेत्र और उसके बाहर शांति, स्थिरता, सहयोग और समृद्धि को बढ़ावा दे। उन्होंने 'साउथ-साउथ सहयोग' की बढ़ती भूमिका को माना और 'ग्लोबल साउथ' की आवाज़ को मज़बूत करने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जतायी।

दोनों नेता अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सार्थक सुधार की दिशा में काम करने पर सहमत हुए, जो आज के भू-राजनीतिक हालात को दर्शाते हों और 'ग्लोबल साउथ' की उम्मीदों को पूरा करते हों। दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार और विस्तार की ज़रूरत को फिर से दोहराया, चाहे वह स्थायी सदस्यता हो या अस्थायी सदस्यता, और यह प्रक्रिया समावेशी और सदस्य देशों के नेतृत्व वाली अंतर-सरकारी बातचीत (जिसमें टेक्स्ट-आधारित बातचीत भी शामिल हो) के ज़रिए होनी चाहिए।

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