वाराणसी , मई 1 -- ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शुक्रवार को श्रीविद्यामठ में कहा कि गौमाता के प्राणों की रक्षा के लिये जितना प्रयास भारत में किया गया, यदि उतना ही यत्न पड़ोसी देशों में होता तो वहां भी उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर उन्हें 'राष्ट्रमाता' घोषित कर दिया जाता।

उन्होंने क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत में स्वयं को 'हिंदूवादी' कहने वाली सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। आखिर गौमाता को राष्ट्रमाता एवं राज्यमाता घोषित कर उनके प्राणों की रक्षा करने में सरकार को क्या कठिनाई है। शंकराचार्य ने बल देते हुए कहा कि गौमाता की रक्षा एवं प्रतिष्ठा के लिए सरकार को स्वयं संज्ञान लेकर कानून बनाना चाहिए था। जब लोकतंत्र में हर निर्णय बहुमत के आधार पर होता है और देश का बहुमत बार-बार गौ-रक्षा का निवेदन कर रहा है, तो इस जनमत की अवज्ञा क्यों की जा रही है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के 78 वर्ष व्यतीत होने के बाद भी हिंदुओं की मांग अनसुनी है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा , " उन सरकारों ने, जिन्होंने हिंदुओं के वोट लेकर उनके साथ छल किया है, अब उन्हें उत्तर देना होगा। अब समय आ गया है कि सनातनी राजनीति का मार्ग प्रशस्त कर गौमाता के प्राणों एवं अपने मूल्यों की रक्षा करें।"पूर्व उद्घोषणा के अनुसार, शंकराचार्य महाराज 'गविष्ठी यात्रा' हेतु आज काशी से प्रस्थान करेंगे। आगामी 3 मई को गोरखपुर से इस 'गविष्ठी धर्मयुद्ध यात्रा' का विधिवत शुभारंभ होगा। यह यात्रा उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। इस दौरान शंकराचार्य जी सनातनी जनता से संवाद स्थापित करेंगे और उन्हें गौ-रक्षण हेतु अपना श्रेष्ठ योगदान देने के लिए प्रेरित करेंगे।

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