पटना , जुलाई 30 -- बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार ने कहा कि राज्य में साइबर अपराध से भी अधिक गंभीर और तेजी से बढ़ता अपराध मानव तस्करी, जिससे निपटने के लिए विशेष और प्रभावी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता हैडीजीपी श्री कुमार ने पुलिस मुख्यालय सरदार पटेल भवन के सभागार में मानव तस्करी के खिलाफ विश्व दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम 'ट्रैप्ड बिहाइंड द स्कैम' को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार में साइबर क्राइम से भी ज्यादा खतरनाक और तेजी से बढ़ता अपराध मानव तस्करी है।उन्होंने कहा कि मानव तस्करी के मामले साइबर अपराध से तीन गुणा अधिक दर्ज होते हैं। इसे रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की जरूरत है। हर जिले में मौजूद महिला थानों में ही एक एंटी ट्रैफिकिंग इकाई की स्थापना करने की आवश्यकता है। हर जिले में मानव तस्करी के खिलाफ सेल विकसित किया जाए। येडीजीपी ने कमजोर वर्ग इकाई को इससे संबंधित प्रस्ताव तैयार कर भेजने के लिए कहा। इसके तहत सभी जिलों में मौजूद महिला थानों में कम से कम दो इकाई का गठन किया जाए, एक इकाई मानव तस्करी के खिलाफ काम करे और दूसरी इकाई महिला एवं बच्चों के खिलाफ अपराध से जुड़े मामले को देखें। दोनों इकाईयों की कमान इंस्पेक्टर रैंक के पदाधिकारी संभाले। जबकि, महिला थाने की कमान डीएसपी रैंक के अधिकारी के पास होनी चाहिए। उन्होंने मानव तस्करी को साइलेंट क्राइम की श्रेणी में रखते हुए कहा कि दूसरे अन्य अपराधों की तरह इस अपराध के जख्म और प्रभाव तुरंत दिखाई नहीं देते हैं, लेकिन यह लंबे समय तक पीड़ित परिवार के ऊपर अपना प्रभाव डालते हैं।
श्री कुमार ने कहा कि बिहार देश में पहला राज्य है, जहां सभी जिलों में इस तरह के मामले देखने के लिए डीएसपी (स्पेशल क्राइम) का पद सृजित हैं और इन पर पदाधिकारी की तैनाती भी है, लेकिन यह व्यवस्था नाकाफी है, क्योंकि मानव तस्करी अपराध के आयाम तेजी से बदल रहे हैं और इसके पीड़ितों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और विकराल होती जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर कोई गायब बच्चा तीन महीने तक नहीं मिलता है, तो इन मामलों को एंटी ट्रैफिकिंग इकाई में ट्रांसफर कर दिया जाए।
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