नागपुर , दिसंबर 31 -- बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने गढ़चिरौली में दो पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले में कथित नक्सली अनिल उर्फ़ रसूल सुकानू सोरी उर्फ़ सुधाकर शंकर सोरी को ठोस सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है।

न्यायमूर्ति अनिल पनसारे और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की पीठ ने यह फैसला सुनाया।

छत्तीसगढ़ निवासी 28 वर्षीय सोरी को सत्र न्यायालय ने आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी। मामला 22 मार्च 2015 का है, जब महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के एटापल्ली क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान घने जंगल में पुलिस दल पर 60-70 नक्सलियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की थी। इस मुठभेड़ में दो पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे।

उच्च न्यायालय ने पाया कि गवाहों द्वारा आरोपी की पहचान के लिए तय प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया और कई गवाहों ने उसे पहली बार अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देखा। अदालत ने इसे कमजोर साक्ष्य मानते हुए आजीवन कारावास की सज़ा रद्द कर दी और आरोपी को बरी कर दिया।

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