नयी दिल्ली , जनवरी 29 -- आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास, सबका विश्वास की भावना लगातार कम हो रही गरीबी का आधार बना है और इसी का परिणाम है कि 2022-23 में देश की गरीबी में महत्वपूर्ण 5.3 प्रतिशत की कमी दर्ज की गयी है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा गुरुवार को संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में कहा गया है कि सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास की भावना के साथ किफायती आवास, सामाजिक और खाद्य सुरक्षा प्रदान करने, वित्तीय समावेशन, आधारभूत जरूरतों तक पहुंच और बेहतर जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए उल्लेखनीय प्रयास किए हैं। इन प्रयासों ने गरीबी को दूर करने और बढ़ती असमानता को कम करने में उल्लेखनीय योगदान दिया है, जिन्हें आर्थिक समीक्षा में प्रमुख रूप से दर्शाया गया है।

श्रीमती सीतारमण द्वारा पेश आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि आय को बढ़ाने, सामाजिक सुरक्षा, श्रम बाजार नियामक और सभी के लिए शिक्षा, व्यक्ति के जीवनकाल और पीढि़यों में सामाजिक गतिशीलता के लक्ष्यों को सुनिश्चित करने में राज्यों को सहायता करेंगी। लोगों की उम्मीदें और नीतिगत प्रयासों का गरीबी और भुखमरी के पैमाने पर मूल्यांकन किया जाता है। विश्व बैंक की अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा-आईपीएल ऐसा ही एक पैमाना है जो किसी भी व्यक्ति की एक दिन की आधारभूत जरूरतों भोजन, कपड़ा और आवास को पूरा करने के लिए पूंजी को दर्शाता है। जून 2025 में विश्व बैंक ने गरीबी रेखा को प्रतिदिन 2.15 डॉलर से बढ़ाकर 3.0 डॉलर कर दिया था और इसे 2021 की क्रय शक्तियों के अनुरूप कर दिया था।

आर्थिक सर्वेक्षण में उल्लेख किया गया है कि संशोधित आईपीएल के साथ भारत में अत्यधिक गरीबी की दर वर्ष 2022-23 में 5.3 प्रतिशत है और निम्न, मध्यम आय गरीबी दर 23.9 प्रतिशत है। विश्व बैंक के अनुसार भारत में गैर-मौद्रिक गरीबी को कम करने के लिए उल्लेखनीय कदम उठाए हैं। विश्व बैंक के गरीबी अनुमानों के साथ-साथ गरीबी रेखा पर तेंदुलकर कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार गरीबी अनुमान भारत में तेजी से कम होती गरीबी को दर्शाते हैं। वर्ष 2011-12 और 2023-24 के बीच पुन: वितरित हस्तक्षेपों द्वारा समर्थित सतत आर्थिक विकास में गरीबी दर को 2011-12 में 21.9 प्रतिशत कम करके 2022-23 में 4.7 प्रतिशत कर दिया जो बाद में 2023-24 में 2.3 प्रतिशत रह गया। यह अनुमान राज्यों और ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में कम गरीबी के अनुमान को दर्शाते हैं। सतत विकास लक्ष्य राष्ट्रीय ढांचागत सूचकांक की 2025 की रिपोर्ट सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने की ओर इन परिवर्तनकारी पहलों के प्रभाव की व्यापक तस्वीर बताती है।

सर्वेक्षण में सामाजिक सुरक्षा तंत्र के अंतर्गत आने वाली जनसंख्या 2016 में 22 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 24.3 प्रतिशत हो गई है, जो देश में सामाजिक सुरक्षा कवरेज के सतत विस्तार को दर्शाती है। ग्रामीण इलाकों में पेयजल के संसाधनों का उपयोग 2015-16 के 94.6 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 99.6 प्रतिशत हो गया है। घरों के लिए एक जैसा विद्युतीकरण 2021-22 में प्राप्त कर लिया गया था, जबकि 2019-20 में शत-प्रतिशत जिलों को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित कर दिया गया था और 31 दिसंबर, 2025 तक 96 प्रतिशत से अधिक स्वच्छ भारत मिशन के गांवो ने ओडीएफ प्लस का दर्जा हासिल कर लिया था। सरकार की सामान्य सामाजिक सेवा व्यय ने सामाजिक क्षेत्र के विकास में गति जारी रखते हुए 2022 से 2026 के पांच वर्षों की वार्षिक वृद्धि दर 12 प्रतिशत दर्ज की गई।

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