नयी दिल्ली , अगस्त 23 -- केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने रविवार को कहा कि सफाई कर्मियों को भी संविधान के तहत हर नागरिक के समान गरिमा और अवसर का अधिकार है।

श्री मेघवाल ने रविवार को कॉन्सटिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (एनसीएसके) के 33वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि देश का संकल्प होना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति आजीविका के लिए ऐसा काम करने को मजबूर न हो, जिससे उसके जीवन, स्वास्थ्य या गरिमा को खतरा हो। उन्होंने कहा कि स्थापना दिवस केवल एक संस्था की यात्रा का उत्सव नहीं है, बल्कि उन लाखों सफाई कर्मियों के योगदान को सम्मान देने का अवसर भी है, जो प्रतिदिन देश के शहरों, गांवों, संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ और सुरक्षित रखने में योगदान देते हैं।

श्री मेघवाल ने कहा कि मैनुअल स्कैवेंजिंग के रूप में रोजगार पर प्रतिबंध और उनके पुनर्वास अधिनियम, 2013 सामाजिक और संवैधानिक जिम्मेदारी को दर्शाता है। किसी कानून की वास्तविक सफलता उसके बनाए जाने में नहीं, बल्कि प्रभावी क्रियान्वयन में होती है। उन्होंने खतरनाक मैनुअल सफाई को पूरी तरह समाप्त करने और सीवर तथा सेप्टिक टैंक की सफाई में मशीनों के अधिकतम इस्तेमाल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मियों को प्रशिक्षण, सुरक्षा उपकरण और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना जरूरी है तथा किसी दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में जवाबदेही तय होनी चाहिए। प्रभावित परिवारों को सहायता, मुआवजा और पुनर्वास भी समयबद्ध तरीके से मिलना चाहिए।

आयोग की स्थापना 1994 में होने के बाद पहली बार सफाई कर्मियों के सम्मान में स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 900 से अधिक सफाई कर्मियों के अलावा केंद्र और राज्य सरकारों, केंद्रशासित प्रदेशों, शहरी स्थानीय निकायों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

उन्होंने कहा कि स्थापना दिवस केवल एक संस्था की यात्रा का उत्सव नहीं है, बल्कि उन लाखों सफाई कर्मियों के योगदान को सम्मान देने का अवसर भी है, जो प्रतिदिन देश के शहरों, गांवों, संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ और सुरक्षित रखने में योगदान देते हैं।

श्री मेघवाल ने कहा कि मैनुअल स्कैवेंजिंग के रूप में रोजगार पर प्रतिबंध और उनके पुनर्वास अधिनियम, 2013 सामाजिक और संवैधानिक जिम्मेदारी को दर्शाता है। किसी कानून की वास्तविक सफलता उसके बनाए जाने में नहीं, बल्कि प्रभावी क्रियान्वयन में होती है। उन्होंने खतरनाक मैनुअल सफाई को पूरी तरह समाप्त करने और सीवर तथा सेप्टिक टैंक की सफाई में मशीनों के अधिकतम इस्तेमाल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मियों को प्रशिक्षण, सुरक्षा उपकरण और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना जरूरी है तथा किसी दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में जवाबदेही तय होनी चाहिए। प्रभावित परिवारों को सहायता, मुआवजा और पुनर्वास भी समयबद्ध तरीके से मिलना चाहिए।

श्री मेघवाल ने कहा कि विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ते हुए देश की स्वच्छता व्यवस्था भी आधुनिक, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी आधारित होनी चाहिए। जिस काम को मशीन सुरक्षित तरीके से कर सकती है, उसके लिए किसी मानव जीवन को जोखिम में नहीं डाला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एनसीएसके सफाई कर्मियों की समस्याओं और शिकायतों को सामने लाने, राज्यों तथा स्थानीय निकायों में उनकी कार्य परिस्थितियों का आकलन करने और सरकार को आवश्यक सुधारात्मक उपाय सुझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने कहा कि सफाई कर्मियों के अधिकारों की रक्षा केवल सरकार या आयोग की जिम्मेदारी नहीं है। राज्य सरकारों, शहरी स्थानीय निकायों, नियोक्ता संस्थानों और समाज को भी इसमें समान रूप से भागीदारी करनी होगी।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित