बारां , जुलाई 25 -- उत्तर प्रदेश के पूर्व शिक्षामंत्री डॉ. रवींद्र शुक्ल ने कहा है कि सनातन और संस्कृति की रक्षा ही देश की रक्षा का सबसे सशक्त माध्यम है।

हिंदी साहित्य भारती के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शुक्ल ने शुक्रवार शाम को यहां धर्मादा सभा भवन में आयोजित कवि जगदीश सोनी की नवप्रकाशित काव्य कृति 'काव्य क्रांति' के भव्य विमोचन समारोह में सम्बोधित करते हुए कहा कि स्वतंत्रता पूर्व देशभक्ति और राष्ट्र चेतना का जो भाव समाज में था, उसमें समय के साथ कमी आयी है और नैतिक मूल्यों का भी ह्रास हुआ है। ऐसे दौर में समाज को जागृत करने और भारतीय संस्कृति के संरक्षण के लिए साहित्य की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।

उन्होंने कहा कि सनातन मूल्यों की रक्षा ही राष्ट्र की रक्षा का आधार है। केवल अहिंसा ही नहीं, बल्कि धर्म और संस्कृति की रक्षा करना भी प्रत्येक नागरिक का परम कर्तव्य है।

साहित्य के स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए डाॅ शुक्ल ने कहा कि सच्चे साहित्य में भारतीय संस्कृति, जनकल्याण और सकारात्मक जीवन मूल्यों का समावेश होना चाहिए। उन्होंने 'काव्य क्रांति' को सामाजिक विसंगतियों और विद्रूपताओं के विरुद्ध सार्थक साहित्यिक हस्तक्षेप बताते हुए इसकी सराहना की।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां शारदा के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन, वंदना एवं संगठन के ध्येय गीत के साथ हुआ। अतिथियों का स्वागत यथार्थ सोनी ने किया। समारोह की अध्यक्षता कोटा के वरिष्ठ साहित्यकार योगेंद्र शर्मा ने की, जबकि अनुराग विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

मीडिया संयोजक प्रद्युम्न गौतम ने बताया कि कृति एवं कृतिकार का परिचय अश्विनी त्रिपाठी ने प्रस्तुत किया कार्यक्रम का संचालन कोटा के प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. विजय जोशी ने किया। कृतिकार जगदीश सोनी ने कहा कि उनकी पुस्तक नयी पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने का माध्यम बनेगी। उन्होंने साहित्य को हर घर का आभूषण बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर उन्होंने अपनी चर्चित कविता 'ए जिंदगी, मैं तेरी चुनौती स्वीकार करता हूं', का ओजपूर्ण पाठ किया, जिसे उपस्थित साहित्य प्रेमियों ने खूब सराहा।

समारोह में साहित्यिक संस्था सारस, राष्ट्रीय कवि संगम एवं अन्य साहित्यिक संगठनों की ओर से जगदीश सोनी का अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार जितेंद्र निर्मोही, सीताराम मीणा, सरोज दीक्षित, प्रह्लाद मीणा, पूरणमल नागर सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, बुद्धिजीवी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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