लखनऊ , अगस्त 5 -- उत्तर प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा 'मोना' ने विधानसभा के मानसून सत्र को निर्धारित समय से पहले अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने पर योगी सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि सरकार जनता से जुड़े मुद्दों और राम मंदिर में चढ़ावे की कथित अनियमितताओं पर चर्चा से बचने के लिए सदन नहीं चलाना चाहती थी।

बुधवार को जारी बयान में श्रीमती मोना ने कहा कि कांग्रेस ने नियम 311 और नियम 56 के तहत रामलला मंदिर में चंदा और चढ़ावे में कथित गड़बड़ी तथा प्रदेश में किसानों को खाद की कमी जैसे मुद्दों पर सदन में चर्चा की मांग की थी, लेकिन सरकार ने इन विषयों पर चर्चा कराने के बजाय विधानसभा की कार्यवाही समय से पहले समाप्त कर दी।

उन्होंने आरोप लगाया कि कार्य मंत्रणा समिति में तय कार्यक्रम के बावजूद सरकार ने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर लोकतांत्रिक परंपराओं की अनदेखी की। मोना ने कहा कि पूर्ण बहुमत वाली सरकार का चर्चा से बचना इस बात का संकेत है कि वह विपक्ष के सवालों का सामना नहीं करना चाहती।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में चढ़ावे, भूमि खरीद, आयोजनों और व्यय से जुड़े मामलों में अनियमितताएं हुई हैं तथा जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि सरकार को इन आरोपों पर सदन में जवाब देना चाहिए था।

श्रीमती मोना ने यह भी कहा कि किसानों को खाद की उपलब्धता, छात्रों से जुड़े मुद्दों और अन्य जनहित के विषयों पर भी सरकार ने चर्चा से परहेज किया। उन्होंने सवाल किया कि जब विधानसभा का सत्र छह अगस्त तक प्रस्तावित था, तो उसे एक दिन पहले समाप्त करने की आवश्यकता क्यों पड़ी।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी जवाबदेही से बच रही है और अपनी विफलताओं का ठीकरा विपक्ष पर फोड़ने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार को विपक्ष के सवालों का जवाब देना चाहिए, न कि सदन की कार्यवाही समय से पहले समाप्त करनी चाहिए।

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