न्यूयॉर्क , फरवरी 01 -- संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच शांति, न्याय और सतत विकास के लिए नये प्रयासों का आह्वान किया है।
श्री गुटेरेस ने यहां पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि दुनिया 'शायद हमारे समय के सबसे बड़े सत्ता हस्तांतरण' से गुजर रही है। सत्ता सरकारों से निजी तकनीकी कंपनियों के हाथों में जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी, "जब व्यवहार, चुनाव, बाजार और यहां तक कि संघर्षों को आकार देने वाली तकनीकें बिना किसी सुरक्षा घेरे के काम करती हैं, तो प्रतिक्रिया नवाचार नहीं, बल्कि अस्थिरता होती है।"महासचिव ने अपने कार्यकाल के अंतिम वर्ष यानि 2026 की प्राथमिकताओं की रूपरेखा पेश करते हुए कहा कि 2026 'अभी से निरंतर आश्चर्य और उथल-पुथल वाले वर्ष के रूप में आकार ले रहा है।' उन्होंने कहा कि अत्यधिक बदलाव के समय में वह उन सिद्धांतों की ओर लौटते हैं, जो बताते हैं कि ताकतें कैसे काम करती हैं। इसमें न्यूटन का तीसरा नियम भी है, जो कहता है कि हर क्रिया की एक समान और विपरीत प्रतिक्रिया होती है।
श्री गुटरेस ने कहा, "इस वर्ष की शुरुआत में, हम ऐसी कार्रवाइयों को चुनने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं जो ठोस और सकारात्मक प्रतिक्रियाएं उत्पन्न करें। हमारे संकटपूर्ण समय में शांति, न्याय, जिम्मेदारी और प्रगति की प्रतिक्रियाएं।"महासचिव ने 'चैन रिएक्शन' का उल्लेख करते हुए कहा कि आज 'दंड न मिलने' का भाव संघर्षों को बढ़ावा दे रहा है, अविश्वास गहरा रहा है और हर क्षेत्र में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने कहा कि "इस बीच, मानवीय सहायता में कटौती निराशा, विस्थापन और मृत्यु की अपनी श्रृंखला प्रतिक्रियाएं पैदा कर रही है।"श्री गुटेरेस ने जलवायु परिवर्तन को 'न्यूटन के सिद्धांत का सबसे सटीक और विनाशकारी उदाहरण' बताया, जहाँ ग्रह को गर्म करने वाली कार्रवाइयां तूफान, जंगल की आग, चक्रवात, सूखा और बढ़ते समुद्री जलस्तर को जन्म दे रही हैं।
महासचिव ने कहा, "वैश्विक समस्याएं किसी एक शक्ति के निर्देश देने से हल नहीं होंगी। न ही वे दो शक्तियों द्वारा दुनिया को प्रतिद्वंद्वी प्रभाव क्षेत्रों में बांटने से हल होंगी।" उन्होंने बहुध्रुवीयता को तेज करने के महत्व पर जोर दिया लेकिन यह भी कहा कि यह भी स्थिरता या शांति की गारंटी नहीं देता है।
श्री गुटेरेस ने कहा, "बहुध्रुवीयता से संतुलन, समृद्धि और शांति उत्पन्न करने के लिए, हमें मजबूत बहुपक्षीय संस्थानों की आवश्यकता है, जो साझा जिम्मेदारी और साझा मूल्यों पर आधारित हो।" संयुक्त राष्ट्र की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि 'संरचनाएं पुरानी हो सकती हैं, लेकिन मूल्य नहीं।' संयुक्त राष्ट्र चार्टर लिखने वाले लोग 'समझते थे कि हमारे संस्थापक दस्तावेजों में निहित मूल्य केवल ऊंचे विचार या आदर्शवादी नहीं थे' बल्कि 'स्थायी शांति और चिरस्थायी न्याय के लिए अनिवार्य शर्त' थे।
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