मोहाली , सितंबर 03 -- वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पंजाब के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने गुरुवार को अकाली दल और भाजपा के बीच संभावित गठबंधन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि दोनों दल एक साथ आने के बावजूद पंजाब में अपना खोया जनाधार हासिल नहीं कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता दोनों दलों को एक से अधिक बार नकार चुकी है। श्री सिद्धू ने कहा कि अकाली दल के अध्यक्ष एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने अवसरवाद और स्वार्थ की सारी सीमाएं पार कर दी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन के दौरान 750 से अधिक किसानों की मौत के बावजूद सुखबीर बादल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़े हो गये। उन्होंने कहा कि कभी राज्यों के अधिक अधिकार और स्वायत्तता की बात करने वाला अकाली दल अब भाजपा के साथ गठबंधन के लिए प्रयासरत है, जबकि भाजपा पर राज्यों के अधिकारों और शक्तियों में हस्तक्षेप करने के आरोप लगते रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस कथित राजनीतिक समझौते से अकाली दल पंजाब की क्षेत्रीय भावनाओं और आकांक्षाओं को दबाने के रास्ते पर बढ़ रहा है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि भाजपा ने अकाली दल के समक्ष तीन कृषि कानूनों के विरोध से पीछे हटने की शर्त रखी है। उन्होंने कहा कि इन्हीं कानूनों को वापस करवाने के लिए किसानों को लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ा था। श्री सिद्धू ने कहा कि अकाली-भाजपा गठबंधन के पिछले अनुभव से स्पष्ट है कि भाजपा के सामने अकाली दल के कथित समर्पण के कारण पंजाब और सिख समुदाय से जुड़े कई मुद्दों का समाधान नहीं हुआ, बल्कि वे और जटिल हो गये। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता अभी भी बरगाड़ी, कोटकपूरा और बहबल कलां घटनाओं को नहीं भूली है। उन्होंने दिल्ली की सीमाओं पर लंबे किसान आंदोलन के दौरान किसानों पर हुई कथित ज्यादतियों और उनके बलिदान का भी जिक्र किया।
श्री सिद्धू ने अकाली दल और भाजपा को हाथ मिलाकर पंजाब में सरकार बनाने का सपना छोड़ने की सलाह देते हुए कहा कि अकाली-भाजपा गठबंधन की स्थिति ऐसी हो गयी है कि दो शून्य भी आपस में जुड़ जायें तो परिणाम शून्य ही रहता है।
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