रोम , मई 20 -- संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मान 'एग्रीकोला पदक' से सम्मानित किया है।

इस सम्मान के साथ ही श्री मोदी दुनिया के उन चुनिंदा वैश्विक नेताओं की सूची में शामिल हो गए हैं जिन्हें कृषि सुदृढ़ीकरण और भूख उन्मूलन में असाधारण योगदान के लिए यह पदक मिला है।

इस सम्मान से कृषि क्षेत्र में बदलाव, खाद्य सुरक्षा और सतत खेती के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी मान्यता मिली है। यहां स्थित एफएओ मुख्यालय के ऐतिहासिक प्लेनरी हॉल में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान संगठन के महानिदेशक डॉ. क्यू डोंग्यू ने प्रधानमंत्री को यह पदक प्रदान किया।

इस सम्मान को स्वीकार करते हुए, श्री मोदी ने इसे भारत के किसानों और कृषि श्रमिकों को समर्पित किया। समारोह के दौरान उन्होंने कहा, "यह सम्मान भारत के उन मेहनती किसानों को समर्पित है, जिनके लचीलेपन और समर्पण ने देश की खाद्य प्रणालियों को मजबूत किया है और वैश्विक खाद्य सुरक्षा में योगदान दिया है।"उन्होंने टिकाऊ कृषि और भूख से निपटने में वैश्विक सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी दोहराते हुए कहा, "आज दुनिया जलवायु परिवर्तन से लेकर आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं तक, कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रही है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी भूखा न रहे, टिकाऊ खेती, नवाचार और सामूहिक वैश्विक कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है।"उल्लेखनीय है कि एग्रीकोला पदक एफएओ का सर्वोच्च सम्मान है। यह सम्मान उन वैश्विक नेताओं को ही मिलता जिन्होंने कृषि को मजबूत बनाने, भूख कम करने और वैश्विक खाद्य प्रणालियों को बेहतर बनाने की दिशा में असाधारण दूरदर्शिता, राजनीतिक प्रतिबद्धता और ठोस योगदान दिया है। इस सम्मान के साथ, श्री मोदी उन चुनिंदा विश्व नेताओं के समूह में शामिल हो गए हैं जिन्हें यह पुरस्कार मिला है। इस समूह में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय और इंडोनेशिया के पूर्व राष्ट्रपति जोको विडोडो शामिल हैं।

एफएओ ने टिकाऊ कृषि और पोषण सुरक्षा पर वैश्विक चर्चाओं को आकार देने में भारत के बढ़ते प्रभाव को स्वीकार करते हुए अपने आधिकारिक प्रशस्ति पत्र में, कृषि क्षेत्र में पैदावार, लचीलेपन और समावेशिता पर केंद्रित नीतियों के माध्यम से भारत के कृषि-खाद्य प्रणालियों के आधुनिकीकरण के प्रयासों की सराहना की। संगठन ने जैव-संवर्धित फसल किस्मों के विस्तार, मजबूत खाद्य वितरण प्रणालियों और ग्रामीण भारत में छोटे किसानों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे कार्यक्रमों जैसी पहलों को विशेष रूप से रेखांकित किया।संगठन ने इस बात का उल्लेख किया कि भारत की कई राष्ट्रीय नीतियां कृषि उत्पादन को स्वास्थ्य और स्थिरता के लक्ष्यों के साथ तेजी से जोड़ रही हैं। बाजरा की खेती, प्राकृतिक खेती, डिजिटल कृषि सेवाओं और किसान कल्याण योजनाओं को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रमों को भारत की विकसित होती कृषि रणनीति के उदाहरणों के रूप में प्रस्तुत किया गया।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित