श्रीनगर , मई 14 -- पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष एवं विधायक सज्जाद लोन ने नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) पर नशा विरोधी अभियान और कथित मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ चलाये जा रहे तोड़फोड़ अभियान पर 'दोहरी बात' करने का आरोप लगाया है।

श्री लोन ने कहा कि जहां दोनों दलों का केंद्रीय नेतृत्व श्रीनगर में सार्वजनिक रूप से ऐसी कार्रवाइयों की आलोचना करता है, वहीं उनके विधायकों को अन्य जिलों में उपराज्यपाल की टिप्पणियों का समर्थन करते भी देखा गया। उन्होंने इस विरोधाभासी रुख को कश्मीर के लोगों को गुमराह करने का प्रयास करार दिया।

श्री लोन ने नेकां और पीडीपी पर विरोधाभासी राजनीति और चुनिंदा विमर्श के माध्यम से 'कश्मीर के लोगों को गुमराह करने' का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, " आज के डिजिटल युग में राजनीतिक दोहरे मापदंड अब छिपे नहीं रह सकते। नेकां और पीडीपी के नेता श्रीनगर में एक बयान देते हैं और कुपवाड़ा, बारामूला तथा बड़गाम जैसे जिलों में बिल्कुल अलग बयान देते हैं। "कथित मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ चल रही नशा विरोधी कार्रवाई और तोड़फोड़ अभियान का जिक्र करते हुए श्री लोन ने कहा कि जहां नेकां और पीडीपी का केंद्रीय नेतृत्व श्रीनगर में सार्वजनिक रूप से ऐसी कार्रवाइयों की निंदा करता है, वहीं उनके विधायक अन्य जिलों में उपराज्यपाल के बयानों की सराहना करते नजर आते हैं। उन्होंने सवाल किया कि पार्टी नेता सार्वजनिक रूप से कार्रवाइयों का विरोध कैसे कर सकते हैं, जबकि उनके प्रतिनिधि अन्य जगहों पर उनका समर्थन करते हैं? उन्होंने इसे 'जनता का मजाक' बताया।पुलिस ने 'नशा मुक्त जम्मू और कश्मीर' अभियान की शुरुआत के बाद से कथित मादक पदार्थ तस्करों से जुड़ी कई आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों को यह कहते हुए ध्वस्त कर दिया कि इस कार्रवाई का उद्देश्य नशीले पदार्थों के व्यापार के खिलाफ एक 'स्पष्ट और सीधा संदेश' देना है।

हाल ही में जम्मू-कश्मीर की स्वास्थ्य मंत्री सकीना इटू ने पुलिस पर नशा विरोधी अभियान का उपयोग 'लोगों को निशाना बनाने' के लिये करने का आरोप लगाया। कल ही, एक स्वतंत्र विधायक शेख खुर्शीद ने कुपवाड़ा में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के नशा विरोधी पैदल मार्च का बहिष्कार किया और सरकार पर नशा विरोधी अभियान के नाम पर निर्दोष लोगों को निशाना बनाने का आरोप लगाया।

पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष श्री लोन ने जम्मू-कश्मीर में शराबबंदी को लेकर चल रही हालिया बहस की भी आलोचना की और नेकां तथा पीडीपी दोनों पर 'राजनीतिक नाटक' करने और जनता को 'चुनावी धोखे' देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान बार-बार मुद्दा उठाने के बावजूद सत्ता में रहते हुये किसी भी दल ने प्रतिबंध नहीं लगाया। उनके अनुसार, यह विवाद राज्यसभा चुनाव सहित बड़े राजनीतिक सवालों से ध्यान भटकाने का एक जरिया मात्र है।

सुश्री महबूबा मुफ्ती द्वारा उठाये गये भ्रष्टाचार के आरोपों और तबादलों से जुड़ी रिश्वतखोरी के दावों पर श्रीलोन ने आरोप लगाया कि तबादलों में भ्रष्टाचार अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने व्यंग्य करते हुये कहा कि इसमें शामिल कथित धन के पैमाने को देखते हुये 'तबादलों' को सरकार की औद्योगिक नीति में शामिल किया जाना चाहिये।

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