नैनीताल , मई 28 -- उत्तराखंड सरकार जेल में बंद सजायाफ्ता बंदियों की समयपूर्व रिहाई से जुड़े मामलों पर उच्च न्यायालय की सख्ती के आगे झुक गयी और उसने अदालत को आठ बंदियों की जल्द रिहाई का भरोसा दिलाया है।
न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी एवं न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ में सजायाफ्ता सात बंदियों के अलावा स्वत: संज्ञान वाली जनहित याचिका पर विगत 25 मई को एक साथ सुनवाई हुई। आदेश की प्रति गुरुवार को उपलब्ध हुई।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता जेएस विर्क ने अदालत को बताया कि सजायाफ्ता बंदियों के मामले पर विचार करने वाली समिति की बैठक विगत 22 मई को हुई थी जिसमें आठ बंदियों की समयपूर्व रिहाई की संस्तुति की गई।
उन्होंने यह भी बताया कि लगभग 40 अन्य मामलों पर भी आने वाले समय में विचार किया जायेगा। राज्य सरकार की ओर से अदालत को आश्वस्त किया गया कि याचिकाकर्ताओं के मामलों पर भी दो सप्ताह के भीतर सक्षम समिति द्वारा विचार कर लिया जाएगा।
सरकार के वक्तव्य को रिकार्ड में दर्ज करते हुए खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 10 जून तय करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिए कि समिति द्वारा की गई कार्रवाई की रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे।
उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय की ओर से सजायाफ्ता बंदियों की समय पूर्व रिहाई के आदेश सभी राज्य सरकारों को दिये गये थे। साथ ही सभी उच्च न्यायालयों को आदेश के अनुपालन की जिम्मेदारी दी गई थी।
इसके बाद उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दायर कर ली थी। राज्य सरकार की ओर से कुछ बंदियों की समय पूर्व रिहाई कर दी गई लेकिन गंभीर अपराधों में बंद बंदियों की रिहाई पर विचार नहीं किया गया था। इसके बाद इनमें से कुछ बंदियों ने अपनी रिहाई को उच्च न्यायालय में चुनौती दी।
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