नयी दिल्ली , अगस्त 18 -- भारतीय पैरा एथलीट सचिन चमारिया ने काहिरा 2026 वर्ल्ड बोकिया चैलेंजर में बीसी 3 पेयर्स इवेंट में सिल्वर और बीसी3 इंडिविजुअल इवेंट में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता है। मज़बूत अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के बीच खेलते हुए, सचिन ने पेयर्स इवेंट में सरिता द्विवेदी के साथ जोड़ी बनाई। यह टूर्नामेंट आधिकारिक वर्ल्ड बोकिया रैंकिंग सर्किट का हिस्सा है और इसमें एथलीट वर्ल्ड रैंकिंग पॉइंट्स के लिए मुकाबला करते हैं।
ये नतीजे अंतरराष्ट्रीय बोकिया में सचिन के बढ़ते रिकॉर्ड में और इजाफ़ा करते हैं। वह अभी बीसी3 कैटेगरी में वर्ल्ड नंबर 20 पर हैं और छह बार नेशनल बोकिया चैंपियन रह चुके हैं। 2021 में अपने कॉम्पिटिटिव डेब्यू के बाद से, उन्होंने कई बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।
काहिरा सचिन के अंतरराष्ट्रीय सफ़र का एक अहम हिस्सा भी रहा है। 2024 में, वह इसी शहर में वर्ल्ड बोकिया चैलेंजर में अंतरराष्ट्रीय सिल्वर मेडल जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष बीसी3 खिलाड़ी बने। उसी साल बाद में, बहरीन में वर्ल्ड बोकिया चैलेंजर में बीसी3 इंडिविजुअल टाइटल जीतकर वह गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष बीसी3 खिलाड़ी बने।
अपने प्रदर्शन पर बात करते हुए, अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट, उद्यमी और दिव्यांगों के समावेशन के समर्थक सचिन चमारिया ने कहा, "हर बार जब मैं भारत की जर्सी पहनता हूँ, तो मैं उन सभी लोगों की उम्मीदों को साथ लेकर चलता हूँ जिन्होंने इस सफ़र में मुझ पर भरोसा किया है। मैं बोकिया स्पोर्ट्स फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन, प्रेसिडेंट, जनरल सेक्रेटरी और पूरी टीम का बहुत आभारी हूँ कि उन्होंने मुझे भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका दिया और मेरी क्षमताओं पर भरोसा जताया। काहिरा, मिस्र में ब्रॉन्ज़ और सिल्वर मेडल जीतना बहुत खास है, लेकिन इससे भी ज़्यादा मायने यह देखना है कि भारतीय बोकिया लगातार आगे बढ़ रहा है। मुझे उम्मीद है कि ये प्रदर्शन दिव्यांग एथलीटों को इस खेल को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे और भारत में बोकिया के लिए ज़्यादा जागरूकता और अवसर पैदा करने में मदद करेंगे।"सचिन के लिए अगली चुनौती सोल में 24 अगस्त से 4 सितंबर तक होने वाली 2026 वर्ल्ड बोकिया चैंपियनशिप होगी। वह मेरिट के आधार पर वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए क्वालिफ़ाई करने वाले पहले भारतीय बीसी3 एथलीट होंगे, जो उनके करियर और भारतीय बोकिया के लिए एक अहम उपलब्धि होगी। बोकिया पैरालिंपिक का एक सटीक निशाना लगाने वाला खेल है, जिसे गंभीर शारीरिक अक्षमता वाले एथलीटों के लिए बनाया गया है। खिलाड़ी अपनी रंगीन गेंदों को सफेद टारगेट बॉल (जिसे 'जैक' कहा जाता है) के जितना हो सके उतना करीब पहुंचाने की कोशिश करते हैं। इस खेल में सटीकता, रणनीति और सही समय पर फैसले लेने की क्षमता की ज़रूरत होती है; हर शॉट में मैच का रुख बदलने की ताकत होती है।
सचिन बीसी3 कैटेगरी में खेलते हैं, जो इस खेल की चार कैटेगरी में से एक है। बीसी3 उन एथलीटों के लिए है जिन्हें चलने-फिरने और शरीर के अंगों के तालमेल में गंभीर शारीरिक दिक्कतें होती हैं। इस कैटेगरी के एथलीट शॉट लगाने के लिए एक खास रैंप और एक स्पोर्ट असिस्टेंट की मदद लेते हैं। असिस्टेंट एथलीट के निर्देशों के अनुसार रैंप को सेट करता है, जबकि एथलीट शॉट, दिशा और रणनीति तय करता है।
सचिन को बोकिया के बारे में 17 साल की उम्र में रीढ़ की हड्डी में चोट लगने के बाद पता चला, जिसने उनकी ज़िंदगी बदल दी थी। बोकिया शुरू करने के बाद से, सचिन ने मिस्र, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, बहरीन, इटली, पोलैंड, दुबई और थाईलैंड में इंटरनेशनल लेवल पर हिस्सा लिया है और एशियन पैरा गेम्स में भी खेले हैं। उनके सफर ने भारत में बोकिया को पहचान दिलाने और दिव्यांग एथलीटों के लिए खेल से पैदा होने वाले मौकों को उजागर करने में मदद की है।
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