नयी दिल्ली , अगस्त 22 -- केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित संस्कृत सप्ताहोत्सव-2026 में 'संस्कृत कर्मयोगी महोत्सव' के दौरान विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के कर्मयोगियों ने संस्कृत में अपना परिचय देने के साथ ही गीत, स्तुति और श्लोक प्रतियोगिताओं में भाग लेकर उत्साहपूर्वक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कुलसचिव प्रो. आर.जी. मुरली कृष्ण ने कहा कि संस्कृत को केवल पुस्तकों और कक्षाओं तक सीमित न रखकर दैनिक जीवन और कार्यस्थल की भाषा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्कृत का प्रयोग कठिन नहीं है और इसकी शुरुआत दैनिक व्यवहार में प्रयुक्त होने वाले सरल शब्दों तथा छोटे-छोटे वाक्यों से की जा सकती है।
उन्होंने कर्मयोगियों से संस्कृत को केवल सप्ताहोत्सव तक सीमित न रखते हुए वर्षभर अपने व्यवहार में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के कर्मयोगियों का संस्कृत से जुड़ाव विद्यार्थियों और समाज तक सकारात्मक संदेश पहुंचाता है तथा संस्कृत के व्यापक प्रचार-प्रसार में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
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