देवरिया , फरवरी 21 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद रमेश अवस्थी ने देवभाषा संस्कृत के विस्तार पर बल देते हुये कहा कि संस्कृत और संस्कृति ही विकसित भारत की आधारशिला हैं।
उत्तर प्रदेश के बरपार गांव में पंडित सुरति नारायण मणि त्रिपाठी की स्मृति में संस्कृत विकास परिषद द्वारा आयोजित देवारण्य संस्कृत समागम में कानपुर के सांसद ने बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए कहा कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और ज्ञान परंपरा की वाहक है। वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, अर्थशास्त्र और नाट्यशास्त्र जैसे ग्रंथों ने भारतीय सभ्यता को विश्व स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाई है। उन्होंने कहा कि संस्कृत ने सदियों से भारतीय संस्कृति को जीवंत बनाए रखा है और आज भी विकसित भारत के संकल्प को ऊर्जा देने की क्षमता रखती है।
विशिष्ट अतिथि पैकौली कुटी के पीठाधीश्वर पवहारी महाराज कौशलेंद्र दास ने कहा कि देवरिया से प्रारंभ हुआ यह अभियान पूरे देश में फैलाया जाएगा। उनके अनुसार संस्कृत ऐसी भाषा है जो राष्ट्र को एकजुट कर सकती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पहचान को सशक्त बना सकती है।
कार्यक्रम में परिषद के संरक्षक और देवरिया के सांसद शशांक मणि ने परिषद के उद्देश्यों को साझा करते हुए पूर्वांचल, विशेषकर देवरिया-कुशीनगर क्षेत्र को ऋषि-मुनियों की तपोभूमि बताया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत भारतीय सभ्यता की समृद्धि का प्रमाण है।
उन्होंने संस्कृत को वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक बनाने के लिए इसे कंप्यूटर प्रोग्रामिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर बल दिया। उनका कहना था कि अमृत काल में संस्कृत के पुनर्जीवन और प्रचार-प्रसार के लिए संगठित प्रयास आवश्यक हैं।
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