बारां , जनवरी 12 -- श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, अयोध्या के कोषाध्यक्ष और राष्ट्रीय संत स्वामी गोविन्द देव गिरी जी महाराज ने कहा है कि संसार में भारत के साथ लोहा ले सके, ऐसी शक्ति कोई नहीं है।
राजस्थान में बारां में मुरलीधर साबू ट्रस्ट द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन समापन के बाद यहां से प्रस्थान होने से पहले राष्ट्रीय संत स्वामी गोविन्द देव गिरी ने यहां पत्रकारों से कहा कि आने वाले समय में देश किस दिशा की ओर जाएगा यह नेतृत्व पर निर्भर करता है। वर्तमान में नेतृत्व सुरक्षित हाथों में है। उन्होंने कहा कि देश के किसानों और हमारी परंपराओं को दबाने के लिए अमरीका प्रयत्नशील है। अमेरीका की दादागिरी का मुकाबला करने का साहस कोई खड़ा नहीं करता, लेकिन मौजूदा केंद्र सरकार ने मजबूती से साहस किया है जो अभिनंदन की पात्र है। यह सब इसलिए है कि देश की बागडोर सुरक्षित हाथों में है तो भारत को आगे उन्नति की ओर ले जाएगा।
स्वामी देव गिरि ने कहा कि हमें सभ्य, सुसंस्कृत,और संवेदनशील भारत का निर्माण करना है जिसमें जाति, धर्म, संप्रदाय से ऊपर उठकर एक दूसरे की पीड़ा को दूर करने के लिए संवेदनशीलता और समझ हो। देश पुन: विश्व गुरु के रूप में विश्व का मार्गदर्शन करे ।
उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को केवल भौतिक उन्नति तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें संस्कार, संस्कृति और चरित्र निर्माण को अपने जीवन का आधार बनाना होगा। उन्होंने कहा कि जिस समाज की युवा पीढ़ी संस्कारवान होती है, वही समाज दीर्घकाल तक सशक्त बना रहता है।
देश के भविष्य के बारे में स्वामी देव गिरि ने कहा कि भारत आने वाले समय में सांस्कृतिक चेतना, आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत अपनी आध्यात्मिक विरासत और आधुनिक प्रगति के संतुलन से विश्व को मार्गदर्शन देने की भूमिका निभाएगा। विकास के साथ धर्म और नैतिकता जुड़ी रहे, तो भारत विश्वगुरु बनने की ओर निश्चित रूप से अग्रसर होगा और एक दिन भारत अपनी खोई हुई प्राचीन परंपरागत प्रतिष्ठा को पुनः प्राप्त कर लेगा।
"हम पहले भारतीय हैं बाद में और कुछ" इस भावना को सर्वोपरि बताते हुए स्वामी देव गिरि ने कहा कि भारत की शक्ति उसकी विविधता में निहित समरसता है। जाति, पंथ, भाषा और क्षेत्र से ऊपर उठकर हम राष्ट्रहित को प्राथमिकता दें, तो देश की एकता और अखंडता और अधिक मजबूत होगी। परस्पर प्रेम, सम्मान और सहयोग की भावना ही भारत को सशक्त राष्ट्र बनाती है।
उन्होंने कहा कि लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति ने विगत 200 वर्ष से हम सभी को गुलाम बनाया हुआ है, लेकिन अब हम सभी भारतीयों को गुलामी के प्रत्येक चिन्ह को मिटाकर आजादी की वैदिक शिक्षा पद्धति अपनानी होगी। लॉर्ड मैकाले ने अपनी शिक्षा पद्धति में जहां विज्ञान और पाश्चात्य संस्कृति को अपनाया है वहीं वैदिक शिक्षा पद्धति हमें सचेत करती है। धर्म, संस्कृति, पर्यावरण सहित समस्त अवधारणाओं को सामाजिक सरोकारों सहित अपनाने के लिये प्रेरित करती है।
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