, April 19 -- बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा कि इस महिला आरक्षण अधिनियम के पारित होने से बिहार में महिला विधायकों की संख्या 122 हो जाती, जो वर्तमान में 29 की संख्या से बहुत ज्यादा होती। उन्होंने कहा कि बिहार में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से महिला सशक्तिकरण के लिए काफी काम हुआ है। उन्होंने कहा कि बिहार में तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री कुमार ने 2006-07 में पंचायतों तथा नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया था, जिसके बाद से उनकी विभिन्न क्षेत्रों में भागीदारी बहुत बढ़ी है और आज इन निकायों में करीब 59 प्रतिशत महिलाएं काम कर रही हैं।
श्री चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह संसद में महिलाओ की भागीदारी बढाने के लिये इस बिल को लाये थे और इसके पास होने से संसद में आधी आबादी की संख्या 272 हो जाती।
बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा कि राजग गठबंधन देश के अंदर की समस्याओं की चिंता में है, जबकि विपक्ष कि कई पार्टियों को बाहरी लोगों की चिंता है। उन्होंने कहा कि राजग के घटक दल महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रयास में जुटे हुए हैं, लेकिन विपक्षी दल इसके घोर विरोधी हैं। उन्होंने कहा कि यह परम्परा काफी पहले से चली आ रही है। कांग्रेस और राजद के सुप्रीमों लालू प्रसाद इसके शुरू से विरोधी रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश भर की महिलाओं के सामने इनका चेहरा उजागर हो गया है और भविष्य में उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
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