नयी दिल्ली , जुलाई 16 -- कांग्रेस ने संसद के मानसून सत्र में परिसीमन विधेयक आने पर उसका विरोध करने के साथ ही चढ़ावा चोरी, पेपरलीक तथा मंहगाई समेत विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने का निर्णय लिया है।

संसद के मानसून सत्र से पहले पार्टी के संसदीय रणनीतिक समूह की गुरुवार को यहां हुई अहम बैठक में सत्र के दौरान अपनाई जाने वाली रणनीति पर गहन विचार विमर्श किया गया।

बैठक के बाद कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख जयराम रमेश ने पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि बैठक करीब डेढ़ घंटे चली और पार्टी की संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी ने इसकी अध्यक्षता की। श्रीमती गांधी के आवास पर हुई इस बैठक में चर्चा के दौरान पार्टी की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। उनका कहना था कि सोमवार से मानसून सत्र शुरू हो रहा है, लेकिन सरकार ने अब तक सत्र में लाए जाने वाले विधेयकों की औपचारिक जानकारी नहीं दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि सत्र शुरु होने से एक पहले 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक होगी जिसमें सरकार प्रस्तावित विधेयकों के बारे में जानकारी देगी।

उन्होंने कहा कि सरकार परिसीमन विधेयक और उससे जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को फिर से लाने का प्रयास कर सकती है, जिसका पार्टी पुरजोर विरोध करेगी। उनका यह भी कहना था कि यदि सरकार मौजूदा 543 लोकसभा सीटों पर महिला आरक्षण लागू कर 181 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करती है तो कांग्रेस उसका समर्थन करेगी लेकिन महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन की कोशिश स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सरकार संविधान की भावना के विपरीत दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश कर रही है, लेकिन कांग्रेस इस मुद्दे पर अन्य विपक्षी दलों के साथ लगातार संपर्क में है और उसे विश्वास है कि सरकार आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाएगी। उनका कहना था कि यदि सरकार इसमें सफल भी होती है तो वह 'कलंकित बहुमत' होगा।

श्री रमेश ने कहा कि कांग्रेस विकसित भारत शिक्षा फाउंडेशन विधेयक, विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) में प्रस्तावित संशोधन तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 में किए जाने वाले संभावित संशोधनों सहित जनविरोधी विधेयकों का भी विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी इन प्रस्तावों के पक्ष में नहीं है और संसद में इनका विरोध करेगी। इसके अलावा कांग्रेस मानसून सत्र में अयोध्या राम मंदिर में 'चढ़ावा चोरी' और आस्था के साथ धोखे, परीक्षा एवं शिक्षा प्रणाली विशेषकर नीट और अन्य पेपर लीक के मामलों, एथनॉल 20 प्रतिशत मिश्रण (ई-20), कमजोर पड़ती विदेश नीति, कमरतोड़ महंगाई तथा अन्य जनसरोकार के विषयों पर सरकार को घेरेगी और इन पर चर्चा की मांग करेगी।

उन्होंने कहा कि संसद का मानसून सत्र 19 दिन का है। इस दौरान अनेक विधेयक पारित होने हैं और विपक्ष चाहता है कि उसके उठाए मुद्दों पर भी चर्चा हो। उनका आरोप था कि मोदी सरकार सर्वदलीय बैठक में विपक्ष के मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात करती है, लेकिन सत्र के दौरान उन पर चर्चा नहीं होती और केवल विधेयक पारित कराए जाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर है।

एक राष्ट्र-एक चुनाव के मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में श्री रमेश ने कहा कि संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को 10 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। रिपोर्ट को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं, लेकिन कांग्रेस इस सिद्धांत के ही खिलाफ है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस संबंध में चार पृष्ठ का पत्र लिखकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं क्योंकि यह संविधान की भावना और लोकतांत्रिक व्यवस्था के विपरीत है।

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