नयी दिल्ली , अप्रैल 16 -- विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने गुरुवार को लोक सभा में परिसीमन विधेयक, 2026 संविधान ( एक सौ इकतीसवां संशोधन ) विधेयक 2026 और संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक 2026 पुरस्थापित करने के बाद उन्हें चर्चा और पारित कराने का प्रस्ताव करते हुए कहा कि परिसीमन के बाद सदन में सदस्यों की 815 हो जायेगी।

उन्होंने कहा कि 815 सीटों में से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। आरक्षित सीटों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए भी आरक्षण की व्यवस्था होगी। उन्होंने कहा कि सीटों का परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर होगा। उन्होंने कहा कि यदि 2027 की जनगणना का इंतजार किया जायेगा, तो 2029 के आम चुनावों में महिलाओं का आरक्षण लागू नहीं हो पायेगा। अगली जनगणना के बाद सीटों का पुनर्समायोजन कर लिया जायेगा।

विपक्ष के विरोध के बाद इन विधेयकों को ध्वनिमत से पुरस्थापित किया गया। इसके बाद अध्यक्ष ओम बिरला ने व्यवस्था दी कि इन विधेयकों पर चर्चा के बाद शुक्रवार शाम चार बजे मतदान कराया जायेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान संशोधन विधेयक पर मतदान के समय गणपूर्ति की व्यवस्था नियमानुसार होगी। सदन में चर्चा के लिए नियम 66 को शिथिल किया गया है और ऐसा कई अवसरों पर एक दूसरे से जुड़े विधेयकों पर चर्चा एक साथ कराने की रही है।

श्री मेघवाल ने कहा कि इस समय उन्हें गर्व, हर्ष और राेमांच की अनुभूति हो रही है। उन्होंने कहा कि इस क्षण का वर्णन इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में किया जायेगा। महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में आरक्षण मिले, इसके प्रावधान बहुत पहले से चल रहे हैं। संविधान सभा में शामिल महिलाओं ने भी इसकी वकालत की थी और पूर्व की सरकारों ने भी इसके लिए प्रयास किये हैं, लेकिन इसे अमली जामा पहनाने का कार्य नरेन्द्र मोदी सरकार कर रही है।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने महिलाओं को सामाजिक न्याय की दिशा में अनेक योजनायें संचालित कीं। इनमें हर घर में शौचालय, घर और रसोई गैस कनेक्शन, पोषण जैसी योजनायें लागू की गयीं। महिलाओं को आर्थिक न्याय दिलाने के लिए जन-धन, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, लखपति दीदी योजना, स्व सहायता समूह जैसी योजनायें और कार्यक्रम लागू किये गये। महिलाओं को राजनीतिक न्याय दिलाने के प्रयास के तहत ये विधेयक लाये गये हैं।

श्री मेघवाल ने कहा कि परिसीमन विधेयक, 2026 के अनुसार अब 50 प्रतिशत सीटों में वृद्धि होकर लोक सभा में 815 सीटें हो जायेंगी, जिसमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। उन्होंने कहा कि इससे पुरुष वर्ग को कोई नुकसान नहीं होगा और किसी राज्य को नुकसान नहीं होगा। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों में भी 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जायेंगी। उन्होंने कहा कि अगली जनगणना के बाद सीटाें का पुनर्समायोजन किया जायेगा।

उन्होंने कहा कि महिलाओं का योगदान समाज के उत्थान में हमेशा से उल्लेखनीय रहा है। संविधान सभा से लेकर अब तक महिलाओं को जब-जब जिम्मेदारियां दी गयीं, उन्होंने बखूबी अपनी प्रतिभा और क्षमता का प्रदर्शन किया है। आज महिलायें हर क्षेत्र में अपने दायित्वों को पूरा करने में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।

श्री मेघवाल ने सभी सदस्यों से इन विधेयकों को सर्वसम्मति से पारित कराने का आग्रह किया।

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